इटावा (जेएनएन)। दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक पर शनिवार  सुबह मालगाड़ी का इंजन फेल होने से डाउन ट्रैक ढाई घंटे तक ठप रहा। इस दौरान ब्रह्मपुत्र सुपरफास्ट एक्सप्रेस सहित आधा दर्जन ट्रेनें प्रभावित हुईं। कड़ी मशक्कत के बाद मालगाड़ी को लूपलाइन पर लाकर ट्रेनों का परिचालक सामान्य किया गया।  रेलवे यातायात निरीक्षक डीएस मीणा ने बताया कि इंजन में खामी आने तकरीबन ढाई घंटे तक ट्रैक प्रभावित रहा। 

एक के पीछे एक खड़ी होती गईं गाड़ियां

जसवंतनगर रेलवे स्टेशन पर लूपलाइन पर खड़ी डीएन 50 दादरी-मुगलसराय मालगाड़ी सुबह  3.30 बजे रवाना की गई। डाउन ट्रैक पर थोड़ी दूर चलने के बाद ही इसका इंजन फेल हो गया। लोको पायलट ने सहायकों के साथ चेक करके इसे चलाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इससे दिल्ली से कानपुर जा रही ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस को 3.52 बजे जसवंतनगर पर रोका गया। उसके पीछे आ रही अन्य गाडिय़ां भी एक के बाद एक खड़ी होती चली गईं। समस्या ये थी कि मैन लाइन पर खड़ी मालगाड़ी को हटाया कैसे जाए। ऐसे में ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस के इंजन को ही मालगाड़ी के पीछे लगाकर काफी धीमी गति से सराय भूपत रेलवे स्टेशन तक लाया गया। यहां लूप लाइन पर मालगाड़ी को खड़ा करने के बाद इंजन वापस ब्रह्मपुत्र में लगा। इस प्रक्रिया में सुबह छह बज गए। छह बजकर पांच मिनट पर सबसे पहले ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस को रवाना किया। इसके बाद एक-एक कर जसवंतनगर के पश्चिमी आउटर पर खड़ी श्रमशक्ति सुपरफास्ट एक्सप्रेस, बलरई तथा शिकोहाबाद में खड़ी दो मालगाड़ी, भदान में खड़ी शिकोहाबाद-कानपुर पैसेंजर व शिकोहाबाद में खड़ी कोटा-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस को रवाना किया गया।

राजधानी समेत कई ट्रेनें प्रभावित

इस दौरान ट्रेनों को दूसरे संकेतक दिखाकर चलाना शुरू किया गया, जिससे हिरनगांव और फीरोजाबाद के बीच ट्रेनें बिना सिग्नल के चलीं। तकनीकी टीम रात साढ़े आठ बजे तक जुटी हुई थी, लेकिन सिग्नल ठीक नहीं हो सके थे। इस कारण अप लाइन पर तूफान मेल, मुरी एक्सप्रेस, कालका मेल, डाउन लाइन पर तूफान, गोमती एक्सप्रेस और करीब आठ राजधानियां प्रभावित हुईं। सिग्नल विभाग के सेक्शन सीनियर इंजीनियर एके शाक्य ने बताया घटना विद्युत विभाग की लापरवाही से हुई। 

30 मिनट में दुरुस्त होगा ट्रेन का पहिया

संसाधनों की दृष्टि से कानपुर का रेलवे तंत्र लगातार मजबूत होता जा रहा है। आधुनिक वाशिंग लाइन और लांड्री के बाद अब रेल का पहिया रिपेयर करने वाली व्हील लेथ मशीन की सौगात मिल गई है। इसकी मदद से अब तीन दिन में पूरा होने वाला काम 30 मिनट में पूरा होगा। ट्रेन चलने के दौरान पहिए और पटरी में घिसाव होता है। इसकी वजह पटरी के साथ पहिया भी क्षतिग्रस्त होता है। कई बार पहिए की मरम्मत जरूरी होती है। घिसा हुआ पहिया ट्रेन की रफ्तार प्रभावित करता है। अभी तक मरम्मत के लिए कोच को वाशिंग लाइन में ले जाकर पहले पहिया निकाला जाता है। इसके बाद उसे मरम्मत के लिए जीएमसी भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन दिन लग जाता है। इसकी वजह से तब तक कोच यूं ही निष्प्रयोज्य खड़ा रहता है।

टेंडर प्रक्रिया पूरी 

चीफ डिपो अफसर (सीडीओ) राहुल चौधरी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने कानपुर में व्हील लेथ मशीन लगाने को हरी झंडी दे दी है। इस मशीन को स्थापित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है और काम शुरू हो गया है। वाशिंग लाइन के पास मशीन स्थापित की जाएगी। पूरी योजना सात करोड़ रुपये की है। इसमें पूरा कोच मशीन के अंदर इंट्री कराया जाएगा और 30 मिनट के अंदर सभी क्षतिग्रस्त पहियों को ठीक कर दिया जाएगा। इस मशीन के लग जाने के बाद वाशिंग लाइन में अधिक कोच की उपलब्धता रहेगी। सीडीओ के मुताबिक उत्तर मध्य रेलवे में यह सुविधा कानपुर के साथ ही इलाहाबाद को भी दी गई है। 

रोज ठीक कराए जाते पांच पहिए 

सीडीओ के मुताबिक, औसतन पांच पहियों को मरम्मत के लिए निकाला जाता है। अमूमन इतने ही कोच तीन दिनों के लिए बेकार हो जाते हैं। नई तकनीक मिलने के बाद इनका प्रयोग तत्काल ही किया जा सकेगा। 

 

Edited By: Nawal Mishra