चंबल के बीहड़ों में कभी डकैतों का था खौफ, अब खूंखार तेंदुए और लकड़बग्घों के आतंक से कांप रहे लोग
चंबल घाटी, जो कभी डकैतों के लिए जानी जाती थी, अब तेंदुए और लकड़बग्घे जैसे खूंखार जंगली जानवरों के आतंक से जूझ रही है।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
चंबल घाटी में तेंदुए और लकड़बग्घे का आतंक।
ग्रामीणों में भय, वन विभाग से मदद की मांग।
दिन में लकड़बग्घा दिखने से दहशत का माहौल।
संवाद सहयोगी, इटावा। एक समय दस्यु सम्राटों की शरण स्थली रही चंबल घाटी आज खूंखार जंगली जानवरों से दहशत में है, यहां प्रत्येक दिन किसी न किसी जानवर का तेंदूए शिकार कर रहे हैं और लकड़बग्घा दिन के समय में ही सड़क पार करते देखे जा रहे हैं। जिससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों ने सैंक्चुअरी विभाग के अधिकारियों से जंगली जानवरों को आबादी क्षेत्र से दूर भगाने का इंतजाम करने की मांग की है।
तहसील चकरनगर के गांव चकरपुरा निवासी प्रत्यक्षदर्शी विष्णु सेंगर ने बताया कि वह सुबह करीब साढे सात बजे भरेह डेयरी पर दूध देकर वापस अपने गांव लौट रहे थे, इसी दौरान लकड़बग्घा चंबल की तरफ से आया और मुख्य सड़क को पार करता हुआ मंदिर की तरफ चला गया।
भरेह निवासी गुरुनारायण ओझा ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि वह भी सुबह शौच क्रिया के लिए निकले थे। इसी दौरान भारेश्वर मंदिर से चकरपुरा गांव की तरफ जाने वाली लिंक रोड पर एक लकड़बग्घा सड़क पर विचरण कर रहा था। उसके मुंह में कोई शिकार भी दबा हुआ था, जो तस्वीर में साफ दिखाई दे रहा है।
किसी राहगीर ने उसकी फोटो कैद कर ली, जिसके बाद यह तस्वीर पूरे क्षेत्र में वायरल हो गई। तस्वीर सामने आने के बाद आसपास के गांव भरेह, चकरपुरा, अम्दापुर आदि गांव के ग्रामीणों में दहशत है। लोग खेतों पर अकेले जाने से कतराने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से इस क्षेत्र में लगातार तेंदुआ व लकड़बग्घे की चहलकदमी देखी जा रही है।
क्यों लौट रहे हैं जंगली जानवर
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि चकरनगर का पूरा इलाका चंबल के बीहड़ों से घिरा है। पहले यहां डकैतों का बसेरा होने से आम आदमी का आवागमन कम था। अब डकैतों के खात्मे के बाद बीहड़ में सन्नाटा है और झाड़ियों में बढ़ोतरी हुई है।
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इसी वजह से मध्य प्रदेश और राजस्थान के जंगलों से होते हुए वन्य जीव यहां तक पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए और जानवरों को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगाया जाए।
लकड़बग्घा अक्सर रात में ही निकलता है, लेकिन दिन में दिखना यह दर्शाता है कि वह भटक गया है। हालांकि यह बहुत ही सीधा होता है। ग्रामीणों से अपील है कि वे अकेले बीहड़ की तरफ न जाएं, बच्चों को अकेला न छोड़ें और कोई भी वन्य जीव दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें। उसे छेड़ने या मारने का प्रयास न करें।- प्रताप सिंह वर्मा, सैंक्चुअरी वन दरोगा।
