चंबल व यमुना खतरे के निशान से महज तीन मीटर दूर

संवाद सहयोगी, चकरनगर : कोटा में अधिक वर्षा होने से कोटा बैराज के दो गेटों से चार फीट यानी 9644 क्यूसिक पानी चंबल नदी में छोड़ा गया है। इसका असर रविवार को चकरनगर क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां चंबल खतरे के निशान से महज तीन मीटर नीचे है। इससे नदी के किनारे के गांवों के ग्रामीणों की नींद उड़ गई है।

चकरनगर तहसील क्षेत्र में चंबल का पानी सहसों गांव के समीप स्थित सिद्धनाथ मंदिर पर जाने वाले मुख्य मार्ग से करीब एक मीटर दूर है। रात्रि में पानी बढ़ता रहा, तो सिद्धनाथ मंदिर का रास्ता सोमवार की सुबह तक बंद हो जाएगा। सिद्धनाथ मंदिर को जाने वाले मार्ग पर बनी पुलिया पर बाढ़ का पानी देखने के लिए आसपास गांव के लोगों की भीड़ एकत्रित रही। चंबल नदी पुल पर भी आने-जाने वाले राहगीर ठिठक गए।

एसडीएम चकरनगर मलखान सिंह ने बताया कि चकरनगर तहसील क्षेत्र में बनाई गई 12 बाढ़ चौकियों पर कर्मचारी तैनात हैं। अभी कोई भी ऐसी स्थिति नहीं है, जिससे जनता को नुकसान पहुंचे। चंबल नदी में आ रही बाढ़ पर बराबर नजर रखी जा रही है। ऐसी कोई समस्या आती है, तो उससे पहले ही अलर्ट हैं।

उदी : यमुना नदी का जलस्तर शनिवार तक बढ़ने के बाद रविवार को आंशिक रूप से गिरावट दर्ज की गई है। यमुना नदी स्थल प्रभारी दौलत राम एवं सहायक अभिषेक कुमार ने बताया कि शनिवार देर रात तक यमुना नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई थी। 118.88 मीटर पहुंचने के बाद रविवार प्रातः से स्थिर होकर शाम चार बजे तक जलस्तर में छह सेमी की गिरावट हुई है। शाम चार बजे जलस्तर 118.82 मीटर दर्ज किया गया है। दिल्ली में यमुना नदी के जलस्तर में भारी मात्रा में बढ़ोतरी की जानकारी मिली है, जिसके चलते अगले दो दिनों में इसका असर यहां भी देखने को मिल सकता है। इस समय यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान 121.92 मीटर से तीन मीटर से अधिक दूर है।

Edited By: Jagran