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इंडिया मार्ट पर फर्म बना ठगी का बड़ा खेल राजफाश, इटावा में ठगने वाले 4 गिरफ्तार, कई राज्यों से 25 शिकायतें हुई थीं दर्ज 

Published: Tue, 11 Aug 2026 11:19 PM (IST)

साइबर सेल और सिविल लाइंस पुलिस ने इंडियामार्ट पोर्टल पर सस्ते अनाज का झांसा देकर किसानों-व्यापारियों से ठगी करने वाले ...और पढ़ें

पुलिस लाइन में साइबर ठगों के बारे में जानकारी देते एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव (बाएं) पीछे खड़े पकड़े गए आरोपित। जागरण

पुलिस लाइन में साइबर ठगों के बारे में जानकारी देते एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव (बाएं) पीछे खड़े पकड़े गए आरोपित। जागरण 

HighLights

  1. इंडियामार्ट पर सस्ते अनाज का झांसा देकर अंतरराज्यीय ठगी।

  2. इटावा में साइबर सेल ने गिरोह के चार सदस्य पकड़े।

  3. 45 लाख की ठगी, 5 करोड़ से अधिक का लेनदेन उजागर।

जागरण संवाददाता, इटावा। इंडियामार्ट पोर्टल की आड़ में किसानों और व्यापारियों को सस्ते दाम पर अनाज उपलब्ध कराने का झांसा देकर आनलाइन ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का साइबर सेल और सिविल लाइंस पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से पांच कंप्यूटर सिस्टम, एक लैपटाप, दो प्रिंटर, 13 एंड्रायड मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, बैंक कार्ड, सिमकार्ड, अनाज के नमूने और ठगी की रकम से खरीदी गई कार बरामद की गई है।

गिरोह के खिलाफ विभिन्न राज्यों से करीब 25 शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें लगभग 45 लाख रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी मिली है जबकि पांच करोड़ से अधिक का लेनदेन इनके खातों में पाया गया है। एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए गिरोह के सदस्यों पर गैंग्स्टर की कार्रवाई कर ठगी की धनराशि की रिकवरी की जाएगी।


मंगलवार को एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने खुलासा करते हुए बताया कि गिरोह के सदस्यों ने इंडियामार्ट पोर्टल पर एग्रो कनेक्ट इंडस्ट्री के नाम से वर्ष 2023 में अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया था। आनलाइन पंजीकरण कराकर व्यापारियों की जानकारी जुटाकर उनके मोबाइल नंबर हासिल करते थे। इसके बाद महिलाओं के माध्यम से व्यापारियों को फोन कर सरसों, मक्का और अन्य अनाज बाजार मूल्य से कम दर पर उपलब्ध कराने का झांसा दिया जाता था।

सौदा तय होने के बाद व्यापारियों से कुल रकम का 50 से 60 प्रतिशत एडवांस गिरोह से जुड़े बैंक खातों में जमा कराया जाता था। रकम खाते में पहुंचने के बाद आरोपित चेक और एटीएम के माध्यम से रुपये निकाल लेते थे। एडवांस रकम लेने के बाद आरोपित व्यापारियों से किसी न किसी बहाने अतिरिक्त रकम की मांग करते थे। रकम देने से इन्कार करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती थी।

डर के कारण कई पीड़ितों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत करने के बजाय राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। साइबर सेल को मिली शिकायतों की जांच किए जाने पर जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के व्यापारियों से ठगी किए जाने की जानकारी का पता चला।


मंगलवार को इटावा साइबर सेल व सिविल लाइंस थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से प्राप्त शिकायतों की जांच के दौरान पोर्टल पर मिले चार संदिग्ध नंबरों को ट्रेस कर शहर के लुहन्ना चौराहा ग्वालियर तिराहा मार्ग के पते पर फर्म संचालित होने की जानकारी पर दबिश देकर गिरोह के सरगना प्रतीक सक्सेना निवासी हरिपुरम कालोनी, सराय दयानत, सिविल लाइंस, विकास दीक्षित निवासी नुमाइश पंडाल, सिविल लाइंस, आकाश बाथम निवासी रामनगर थाना फ्रेंड्स कालोनी और प्रवेश कुमार निवासी कथगवां थाना इकदिल को गिरफ्तार किया। एसएसपी ने बताया कि गिरोह के अकाउंटों की जांच में अब तक पांच करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का पता चला है। इस मौके पर एएसपी क्राइम संतोष सिंह भी मौजूद रहे।

दुकान की आड़ में चल रहा था ठगी का नेटवर्क

पुलिस पूछताछ में गिरोह के सरगना प्रतीक सक्सेना ने बताया कि लुहन्ना चौराहा के पास उसकी दुकान है। यह कारोबार एग्रो कनेक्ट इंडस्ट्री के नाम से संचालित किया जा रहा था। उसने वर्ष 2023 में फर्म का पंजीकरण कराया था। फर्म के नाम से संयुक्त बैंक खाता खोला गया था, जिसमें देशभर से अलग-अलग किसान व व्यापारियों से छोटी-बड़ी रकम मंगाई जाती थी। इसके बाद खाते में आई रकम को निकाल लिया जाता था। पुलिस फरार साथी आमिर सोहेल की तलाश कर रही है, जिसे आरोपित ने अपना पार्टनर बताया है। आकाश आरोपित प्रतीक का ड्राइवर था, जबकि विकास और सर्वेश दुकान पर काम करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और देश के अन्य राज्यों में कितने व्यापारियों को इसी तरीके से निशाना बनाया गया।

कंप्यूटर, मोबाइल, और फर्जी दस्तावेज बरामद

पुलिस ने पांच कंप्यूटर सिस्टम, एक लैपटॉप, दो प्रिंटर, 13 मोबाइल फोन, पांच सीपीयू, 20 चार्जर, करीब 2,000 विजिटिंग कार्ड, छह सिमकार्ड, विभिन्न बैंकों के डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक, आधार व पैन कार्ड, फर्जी पहचान दस्तावेज, दो थैले मक्का, दो थैले सरसों, दो थैले पलिया-दलिया, फर्जी मोहर और दस्तावेजों की फाइल बरामद की है। इसके अलावा ठगी की रकम से खरीदी गई कार भी कब्जे में ली गई है। इसके अलावा गिरोह द्वारा विभिन्न बैंकों में तीन वर्ष में खुलवाए गए 20 से अधिक करंट अकांउटों को भी पुलिस ने फ्रीज कराकर उनकी जांच शुरू करा दी है। एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए ठगी गिरोह पर गैंगस्टर की कार्रवाई अमल में लाकर इनके द्वारा अर्जित की गई रकम की वसूली की जाएगी।

अन्य राज्यों में आपराधिक इतिहास खंगाल रही पुलिस

सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपितों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू कर दी है। साथ ही अन्य राज्यों में दर्ज शिकायतों और मुकदमों से भी आरोपितों का संबंध खंगाला जा रहा है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है। बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। फरार सरगना का पार्टनर आमिर सोहेल समेत गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में भी पुलिस टीम दबिश दे रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करने वाली साइबर सेल और सिविल लाइंस पुलिस की संयुक्त टीम को 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की।

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