एटा, जासं। इन दिनों यातायात माह चल रहा है, मगर सड़कों पर गुजरने वाले ओवरलोड वाहनों पर कोई अंकुश नहीं है। सड़कें इन वाहनों के बोझ से दब रहीं हैं। हाल यह है कि कहीं सड़कें टूटी हुईं हैं, तो वहीं हाईवे पर फोरलेन के निर्माण का काम चलने के कारण वे संकरी हो गई हैं। ऐसे में ओवरलोड वाहन लोगों की जान मुश्किल में डाल रहे हैं। ऐसी कोई सड़क नहीं, जिससे होकर यह वाहन न गुजरते हों।

शहर में ओवरलोड वाहनों को हर समय गुजरते हुए देखा जा सकता है। जब यह वाहन शहर की दूसरी सड़कों से निकलते हैं तो वहां की जीर्ण-शीर्ण हालत में पड़ी पुलियां भी धसक जाती हैं। टूटी सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्रालियां पलट जाती हैं। ठंडी सड़क पर तीन माह पूर्व ओवरलोड वाहन के कारण पुलिया धसक गई और ट्रक की चपेट में आकर एक महिला की मौत हो गई थी। फिर भी इस स्थिति पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा। ओवरलोड ट्रकों पर दो प्रकार का जुर्माना लगाने का खाका तैयार किया गया था। यह तय हुआ था कि खनन विभाग घनमीटर से अर्थदंड लगाएगा तो परिवहन विभाग वाहनों पर तय क्षमता से ज्यादा हर टन माल पर अतिरिक्त जुर्माना वसूलेगा। ओवरलोड ट्रक पकड़े जाने पर दो हजार जुर्माना के अलावा हर टन अतिरिक्त माल पर एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। ट्रकों पर माल लादने की क्षमता 10 चक्का ट्रकों पर 18 टन, 12 चक्का ट्रकों पर 25 टन, 14 चक्का ट्रकों पर 32 टन है। लेकिन यहां देखने में यह आ रहा है कि मानक से डेढ़ गुना ज्यादा तक लोड होता है। धर्मकांटों पर तौल की जो पर्ची मिलती है उस पर लोड दर्ज होता है, लेकिन फिर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। सिर्फ वाहनों के चालान कर दिए जाते हैं। यह स्थिति काफी समय से यहां बनी हुई है। सीओ सिटी एवं ट्रैफिक देव आनंद ने बताया कि यातायात माह के अंतर्गत ओवरलोड वाहनों के चालान भी किए जा रहे हैं। एटा में बाईपास बनने के बाद शहर में ओवरलोड वाहनों का बोझ कम हो जाएगा।

Posted By: Jagran

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