एटा, जासं। ग्रीष्मावकाश के बाद परिषदीय स्कूलों में बच्चे पहुंचने से पहले साफ-सफाई को अधिकांश स्कूलों में सफाईकर्मी नहीं पहुंचे। चूंकि रविवार के बाद सोमवार से स्कूल खुलने थे। ऐसे में शनिवार को खुद शिक्षकों को झाडू थामकर साफ-सफाई करनी पड़ी। मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद पंचायती राज विभाग स्वच्छता के लिए भी सहयोग करने में आगे न आया। खुद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर सहयोग की बात कही, लेकिन कोई तबज्जो नहीं मिली।

25 जून से स्कूल खोलकर शिक्षकों को साफ-सफाई के लिए निर्देश दिए गए थे। स्कूल खुले भी जहां संभव हुआ श्रमिकों से या अन्य तरह सफाई शुरू कराई गई। तमाम स्कूलों में सफाई कर्मियों के आने का इंतजार शुक्रवार तक रहा। जब सफाईकर्मी नहीं पहुंचे तो शनिवार को खुद शिक्षक ही सफाई करने को मजबूर हुए। मजबूर होना भी इसलिए था कि कहीं कार्रवाई न हो जाए। दूसरी ओर सफाईकर्मी जिम्मेदारी से बचकर भी मौज करते रहे। शिक्षा विभाग भी इस मामले पर बैकफुट पर नजर आया। क्योंकि स्वच्छता में सहयोग के लिए पंचायती राज से आग्रह करने के बाद भी सफलता नहीं मिली। ऐसे हालात में शिक्षक संगठनों में रोष दिखा। प्राथमिक शिक्षक संघ के संयोजक राकेश चौहान का कहना था कि शासन स्कूलों में स्वच्छता की व्यवस्थाएं करे। जल्द सफाईकर्मियों की व्यवस्था और उनकी जवाबदेही तय नहीं होती है तो संगठन आवाज उठाएगा।

Posted By: Jagran

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