जासं, एटा: सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिग की कोई व्यवस्था नहीं है। इस वजह से वहां वर्षा का जल संचित नहीं हो पा रहा। जल संचयन के लिए कई बार आदेश दिए गए, लेकिन व्यवस्था आज तक नहीं हुई। हमेशा आदेशों की अनदेखी की जाती रही। इस वजह से भूजल स्तर नहीं बढ़ पा रहा।

विशेषज्ञों की मानें तो जिस स्थान का भूजल स्तर गिरा हुआ है, अगर वहां रेन वाटर हार्वेस्टिग की व्यवस्था होगी तो काफी हद तक जलस्तर बढ़ सकता है। यही वजह है कि सरकार ने सबसे पहले यह प्रयास किए कि जो सरकारी इमारतें हैं वहां हार्वेस्टिग की व्यवस्था की जाए। यह भी अनिवार्य है कि 300 वर्ग मीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल जगह में बने निजी व सरकारी भवनों में जल संचयन हो। इसके लिए भवन चिहित करने के निर्देश दिए गए थे। चार साल पहले सभी सरकारी इमारतों को चिहित किया गया था, जिसमें तहसील, नगर पालिका, जिला अस्पताल, विकास भवन, जिला पंचायत समेत कई सरकारी भवन दायरे में आए थे। बाद में आदेश हवा हो गए और जल संचयन की व्यवस्था नहीं की गई। लापरवाही इसलिए साफ दिखाई देती है कि लाखों की लागत से भवन बना लिए जाते हैं पर कुछ हजार रुपये में भी रेन वाटर हार्वेस्टिग की व्यवस्था हो सकती है, उसके बंदोबस्त नहीं किए जाते। आदेश यह भी आया था कि सभी थाना भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जाए, क्योंकि यह थाने 300 वर्ग मीटर क्षेत्र से अधिक जगह में बने हैं। खारे पानी से मिल सकती है निजात:

जलेसर क्षेत्र के गांव सकरौली, बारा समसपुर, पायदापुर, करहला, कासिमपुर, जैनपुरा, गोपालपुर, रामगढ़ी आदि गांव ऐसे हैं जहां खारे पानी की समस्या है और भूजल स्तर काफी गिरा हुआ है। चेकडेम या रेन वाटर हार्वेस्टिग की व्यवस्था की जाए तो जलस्तर बढ़ सकता है और खारे पानी से भी कुछ हद तक निजात मिल सकती है। इस क्षेत्र में जो भी भवन हैं वहां हार्वेस्टिग की व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए। रीचार्ज होना चाहिए पानी:

पर्यावरणविद एवं जल विशेषज्ञ ज्ञानेंद्र रावत का कहना है कि जहां का पानी मीठा हो वहां धरती के नीचे बारिश का पानी भेजकर ग्राउंड वाटर को रीचार्ज किया जा सकता है। इस पानी को हम अपनी मनमर्जी के मुताबिक खर्च नहीं कर सकते, लेकिन इस तरीके से जमीन के अंदर मौजूद मीठे पानी के स्तर को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए खास तरह का गड्ढा खोदना पड़ता है।

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