जासं, एटा: उम्र 81 हो चुकी है, हाथ-पैर और चेहरे की झुर्रियां भले ही ढलती उम्र का संकेत देती हैं, लेकिन इस उम्र में भी देश और समाज की रक्षा सुरक्षा के प्रति उनमें जवानों जैसा जज्बा अभी भी है। 28 साल सरहद की रक्षा में योगदान किया तो सेवानिवृत्ति के बाद भी सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर सक्रिय रहते हुए सुरक्षा मामलों को बेहतर बनाने के मुद्दों में सहयोग के लिए तत्पर हैं।

जैथरा निवासी कैप्टन महावीर शर्मा 1961 में सेना में भर्ती हुए। 1965 तथा 1971 कि पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध में नायक सूबेदार तथा फिर कैप्टन की जिम्मेदारी के साथ देश रक्षा में अहम योगदान निभाया। 1971 के युद्ध में दुश्मनों का डटकर मुकाबला करते हुए दर्जनों को अपनी गोली का निशाना बनाया। उस समय 11 महीने 20 दिन तक देश रक्षा की खातिर अपने घर का मुंह तक नहीं देखा। 1989 में सेवानिवृत्ति तो हो गई, लेकिन इसके बाद भी वह सुरक्षा के मुद्दे पर सक्रिय बने हुए हैं।

देश तथा सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए गौरव सेनानी कल्याण समिति का संचालन कर रहे हैं। कारगिल युद्ध हो या फिर कई बार पाकिस्तान के हमलों के मध्य उन्होंने पूर्व सैनिकों की सहमति से सरकार को जरूरत पर फिर से गन मशीन थामने जैसे जज्बे से परिचित कराया। अपने-अपने क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा के लिए भी वह पूर्व सैनिकों के साथ तत्पर रहते हुए शासन प्रशासन को भी अपने सुझाव देते हुए सहयोगी की भूमिका में बने हुए हैं। सुरक्षा के क्षेत्र में बात स्वावलंबन की की जाए तो उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया ही है। वहीं सेना की तैयारी के लिए भी उनका मार्गदर्शन हर स्तर पर करते नजर आते हैं। उन्हीं का मार्गदर्शन लेकर जिले ही नहीं विभिन्न जनपदों के युवा सेना के विभिन्न पदों पर देश रक्षा के साथ सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर भी सहयोगी बने हुए हैं।

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