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एटा के फर्जी मेडिकल कॉलेज की कहानी: छात्राओं को बेच दी करोड़ों की फेक डिग्रियां, कई लग्जरी कारें और खरीदी प्रॉपर्टी 

Published: Sun, 20 Sep 2026 09:49 AM (IST)Updated: Sun, 20 Sep 2026 09:52 AM (IST)

एटा के महमूदपुर नगरिया स्थित फर्जी बीएस मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक सतेंद्र कुमार ने छात्राओं को फर्जी डिग्री बेचकर लाखों ...और पढ़ें

पुलिस गिरफ्त में आरोपित।

पुलिस गिरफ्त में आरोपित।

HighLights

  1. फर्जी डिग्री बेचकर प्रबंधक सतेंद्र कुमार ने लाखों कमाए।

  2. छात्राओं को नर्सिंग कोर्स के नाम पर बरगलाकर ठगा गया।

  3. कॉलेज को पिछले साल ही अवैध घोषित किया गया था।

जागरण संवाददाता, एटा। मारहरा के महमूदपुर नगरिया स्थित फर्जी बीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का प्रबंधक सतेंद्र कुमार चंद वर्षों में ही फर्जीवाड़ा करके मालामाल हो गया। उसकी टीम छात्राओं को बरगलाकर लाती थी और चार से पांच लाख रुपये में नर्सिंग कोर्स कराने का ठेका लेता था। पुलिस की गिरफ्त में आए सतेंद्र ने काफी कुछ कबूला है।
यह भी बताया जाता है कि कक्षाएं नहीं लगती थीं और परीक्षाओं के समय छात्र-छात्राओं को बुला लेते थे। मई 2025 में कुछ छात्र-छात्राओं ने शिकायत की कि उन्हें फर्जी डिग्री दे दी गई। यह छात्र-छात्राएं जब नौकरी के लिए विभिन्न संस्थानों में गए तो कई की डिग्री फर्जी ठहरा दी गई।

उस समय शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने एडीएम और डीआइओएस को जांच सौंपी। दो सदस्यीय जांच कमेटी ने मेडिकल कॉलेज का फर्जीवाड़ा पकड़ा। उस समय यह भी पर्दाफाश हुआ कि इस कालेज की किसी भी विश्वविद्यालय से संबद्धता नहीं है, लेकिन वह हापुड़ पोलार्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध बताता था।

हापुड़ पोलार्ड विश्वविद्यालय से बताता था संबद्ध

यहां की जांच टीम ने शिकायतकर्ता नगला इंद्रजीत थाना अमांपुर निवासी प्रिया के भी बयान दर्ज किए थे। उसने बताया कि जीएनएम कोर्स के लिए 40 हजार रुपये जमा किए थे। बाद में बरगलाकर 26 हजार रुपये और ले लिए। यह रुपये सिर्फ सर्टिफिकेट देने के नाम पर लिए गए। इसके अलावा प्राप्ति चौहान निवासी पिथनपुर सिढ़पुरा कासगंज और नेहा, लक्ष्मी तथा बबली ने भी शिकायतें की थीं।

जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने तत्कालीन अपर जिलाधिकारी न्यायिक रमेश मौर्य और जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच सौंपी।

एडीएम और डीआईओएस ने पिछले वर्ष ही बताया था अवैध

उधर छात्राओं का पैसा कालेज के प्रधानाचार्य मोहम्मद सलीम कुरैशी ने लौटाने से इंकार कर दिया था। यह भी पता चला है कि दो वर्ष पूर्व डी फार्मा के सर्टिफिकेट के लिए 80 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की रकम सैकड़ों छात्राओं से ली गई थी। आरोपित के पास कई लग्जरी गाड़ियां व अन्य चल-अचल संपत्ति है। सवाल यह भी है कि जब एडीएम और डीआइओएस ने पिछले वर्ष ही इस मेडिकल कॉलेज को फर्जी बताया था। इसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं की गई। मेडिकल कॉलेज को नोटिस भी दिए गए थे।

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