जागरण संवाददाता, एटा: उच्च न्यायालय ने बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी बीएड की डिग्रियों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों की बर्खास्तगी को उचित माना है। इससे जिले में 80 शिक्षकों की बर्खास्तगी प्रभावी हो गई है। पूर्व में इन शिक्षकों को बीएसए ने बर्खास्त किया था। वहीं 40 टेंपर्ड डिग्रियों से नौकरी पाने वालों की बर्खास्तगी की अंतिम मुहर विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट पर निर्णय आने के बाद होगी।

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की वर्ष 2004-2005 की बीएड डिग्रियों की एसआइटी ने की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। चार सालों से चल रहा यह मामला जांच को लेकर दिसंबर 2019 में अंतिम चरण में पहुंचा। एटा में 120 फर्जी बीएड डिग्री तथा टेंपर्ड मार्कशीट पाए जाने पर इतने ही शिक्षक-शिक्षिकाओं को चिहित किया गया। इन सभी को उस समय बीएसए द्वारा बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी के बाद फर्जी डिग्रीधारकों ने न्यायालय का सहारा लिया तथा स्थगन आदेश पाने से बर्खास्तगी रुक गई। वहीं न्यायालय के निर्देश पर पूर्व स्थिति बहाल कर दी गई। एक साल बाद उच्च न्यायालय ने फर्जी डिग्रीधारकों के विरुद्ध बर्खास्तगी को जायज माना।

आदेश मिलने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने भी हरकत में आते हुए 80 फर्जी डिग्रीधारक शिक्षक-शिक्षिकाओं की पूर्व में हुई बर्खास्तगी को प्रभावी कर दिया है। अभी 40 अन्य बर्खास्त शिक्षक और भी हैं, जिनके शैक्षिक अभिलेख टेंपर्ड पाए गए थे। विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट आने के बाद शेष 40 शिक्षक-शिक्षिकाओं का भी भविष्य तय होगा। विश्वविद्यालय को चार माह का समय दिया गया है। बीएसए संजय सिंह ने 80 शिक्षक-शिक्षिकाओं पर पूर्व में बर्खास्तगी की कार्रवाई प्रभावी करते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन शिक्षकों में तमाम पर प्रधानाध्यापकों के चार्ज भी हैं। पूर्व में बर्खास्तगी के साथ इन पर एफआइआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। काम न आई कोई रणनीति

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बीएड फर्जी डिग्रीधारकों ने पूर्व में बर्खास्तगी के बाद न्यायालय स्तर पर नौकरी बचाने को काफी जोर लगाया। दो बार राहत मिलने से उन्हें नौकरी बचने की उम्मीद थी, लेकिन अब अंतिम आस भी टूट गई।

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