एटा, जासं। मौसम में परिवर्तन के साथ ही संक्रामक बीमारियों ने हमला बोल दिया है। अकेले जिला अस्पताल में ही हर रोज एक हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक मरीज वायरल, टायफाइड और मलेरिया हैं। अवागढ़ क्षेत्र में पिछले दिनों डेंगू से वृद्धा की मौत भी हो गई थी।

सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी और पैथोलॉजी लैब में पैर रखने की जगह नहीं थी। पंजीकरण कक्ष से लेकर चिकित्सकों के कक्ष तक कतार लगी थीं। पूरे दिन में 895 नए रोगियों ने पंजीकरण कराए। जबकि पुराने रोगियों की संख्या भी 300 से अधिक रही। इनमें सर्दी जुकाम, खांसी और वायरल फीवर के मरीज सबसे अधिक थे। 59 लोगों की मलेरिया, 55 की टायफाइड और चार लोगों की डेंगू जांच कराई गई। इनमें टायफाइड के चार मरीज पाए गए।

जिला अस्पताल के अलावा निजी चिकित्सकों के यहां और कस्बाई सरकारी अस्पतालों में भी खासी भीड़भाड़ रही। पैथोलॉजी लैबों पर भी सुबह से शाम तक टेस्टिग कराने वालों की भीड़ बनी रही।

जिला अस्पताल के डॉ. मनोज गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से व्यक्ति जल्दी ही बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। डायरिया, मौसमी बुखार, मलेरिया की समस्याएं सर्वाधिक होती हैं। यह जरूरी है कि समय पर बीमारी की पहचान और इलाज करा लिया जाए। अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है। बच्चे भी बीमारियों की चपेट में:

बदलते मौसम का असर बच्चों पर भी नजर आ रहा है। तमाम बच्चे वायरल संक्रमण के अलावा टायफाइड और मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल सहित शहर के बाल रोग चिकित्सकों के क्लिनिक पर हरदम भीड़ दिख रही है।

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