जासं, एटा : अवागढ़ विकास खंड क्षेत्र के गांव नगला नया में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित के घर पर प्रशासन ने शुक्रवार को बुलडोजर चलवा दिया। घर में सेनानी को पुत्र और उनकी पत्नी ही रहते थे। आरोप है कि तोड़फोड़ से पहले कोई नोटिस नहीं दिया और अचानक आकर तोड़फोड़ कर दी। इस मामले को लेकर शनिवार को कलक्ट्रेट पर हंगामा हुआ और आश्रित ने प्रशस्ति पत्र व स्वतंत्रता सेनानी के कार्ड वापस कर दिए।

गांव नगला नया निवासी स्वर्गीय सरदार सिंह स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। उनके पुत्र सुरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी रामादेवी का कहना है कि साढ़े छह बीघा जमीन वर्षों पूर्व प्रशासन ने उन्हें दी थी, जिस पर उन्होंने एक टीनशेड बना लिया और झोंपड़ी डालकर वहीं रह रहे थे। शुक्रवार शाम तहसीलदार जलेसर अजीत कुमार सिंह बुलडोजर लेकर पहुंचे और मकान को ढहा दिया। इससे पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया। तोड़फोड़ के दौरान घर में जो सामान रखा था वह भी जब्त कर लिया गया। आश्रित शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं के साथ कलक्ट्रेट पर पहुंचे। वहां अतिरिक्त एसडीएम वेदप्रिय से किसान नेताओं की नोंक-झोंक भी हुई। सुरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी ने स्वतंत्रता सेनानी का परिवार होने के नाते प्रदेश कांग्रेस कमेटी, स्वतंत्रता सेनानी संगठन व अन्य कुछ संगठनों द्वारा पूर्व में दिए गए प्रशस्ती पत्र एवं सरकार द्वारा जारी किए गए कार्ड वापस कर दिए मगर एसडीएम ने लेने से इन्कार कर दिया। विरोध स्वरूप कार्ड वहीं छोड़कर चले आए, वहीं भारतीय किसान यूनियन किसान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर ने आंदोलन की धमकी दी है। 15 वर्ष पहले आवंटित की थी जमीन

यह जमीन ग्राम समाज की है। 15 बीघा इस जमीन को कान्हा गोस्थल के लिए एक साल पूर्व आवंटित कर दिया गया है। इसमें से 12 बीघा जमीन आवंटन के समय ही मुक्त करा ली गई थी। शेष बची तीन बीघा जमीन के कुछ हिस्से पर सुरेंद्र सिंह अवैध कब्जा करके रह रहे थे। प्रशासन के अभिलेखों में कहीं भी यह जमीन स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित के नाम दर्ज नहीं है। कान्हा गोस्थल के लिए यह जगह अवैध कब्जे से मुक्त कराई जा रही है। पुत्र ने कहा मा को मिलती रही पेंशन

पुत्र सुरेंद्र सिंह का कहना है कि उनके पिता स्वर्गीय सरदार सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने आजादी आदोलन में भागीदारी की। 1957 में स्वतंत्रता सेनानी का सर्टिफिकेट मिला और 6 साल पूर्व तक उनकी माता के निधन तक उन्हें पेंशन मिलती रही। रेलवे व रोडवेज पास के अलावा अन्य सुविधाएं भी प्राप्त हुई। स्वतंत्रता सेनानी होने के आधार पर ही विभिन्न संगठन उनकी माता का सम्मान समय-समय पर करते रहे। राजकीय अभिलेखों में यह जमीन कान्हा गोस्थल के नाम है। इस जगह को लेकर गांव के किसी भी व्यक्ति का कोई भी अभिलेख ऐसा नहीं है जिसका जमीन पर वैध कब्जा हो। अवैध कब्जा करके लोग रह रहे हैं, इसलिए इसे मुक्त कराया गया है। जहां भी जमीन अवैध कब्जों से मुक्त कराई जा रही है वहां नोटिस पहले ही दे दिए जाते हैं। कब्जा न छोड़ने पर कार्रवाई की गई है।

- आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन एटा

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