जागरण संवाददाता, कासगंज (एटा) : कासगंज-बरेली ट्रैक पर अब रोमांच की रफ्तार मिलने लगेगी, फिलहाल पैसेंजर की छुक-छुक से यह ट्रैक शुरू होगा और उसके बाद पहाड़ से मैदान तक रेल की कड़ी जुड़ जाएगी। 11 अगस्त को रेल राज्यमंत्री मनोज सिंहा बरेली से हरी झंडी दिखाकर पैसेंजर ट्रेन को कासगंज के लिए रवाना करेंगे।

कासगंज-बरेली ट्रैक पर बीते लंबे समय से ट्रेन दौड़ने का इंतजार किया जा रहा है। कभी ट्रेन दौड़ाने के दावे किए जाते हैं तो कभी कहीं न कहीं कोई विवाद खड़ा हो जाता है। पहले रामगंगा को लेकर रेलवे के अधिकारियों में असमंजस रही उसके बाद कासगंज बरेली ट्रैक में खामी पाई गई। मामले को भारत के रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गंभीरता से लिया तो अब नतीजा मिलता दिखाई दे रहा है। रेल राज्यमंत्री मनोज सिंहा 11 अगस्त को बरेली से कासगंज के लिए पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे और उसके साथ ही इस ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। इज्जत नगर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि 11 अगस्त को रेल राज्यमंत्री आ रहे हैं। उसके बाद ही गाड़ियों का टाइम टेबिल फिक्स हो जाएगा। ट्रेनों का संचालन होना अब तय हो गया है।

शुरू में दौड़ेंगी दो ट्रेन

कासगंज बरेली ट्रैक पर शुरूआत में रफ्तार की ट्रेनें नहीं दौड़ाई जाएंगी बल्कि एक जोड़ी पैसेंजर ट्रेन चलाई जाएगी। इज्जत नगर मंडल के डीआरएम चंद्रमोहन जिंदल ने बताया है कि प्रारंभ में पैसेंजर ट्रेन चलाकर व्यवस्था परखी जाएगी। उसके बाद नई समय सारिणी बनेगी।

नहीं हुआ निस्तारण

कासगंज बरेली ट्रैक पर ट्रेन दौड़ाने में कासगंज सिटी से जंक्शन के मध्य पड़ने वाली विद्युत हाईटेंशन लाइन अवरोध बनी हुई थी। रेलवे द्वारा प्रदेश के ऊर्जा विभाग को पत्र लिखने के साथ ही अन्य अधिकारियों से भी वार्ता की गई लेकिन इस हाइटेंशन लाइन का कोई भी निस्तारण नहीं निकला।

मिलेगी सहूलियतें

बरेली से कासगंज ट्रैक शुरू हो जाने के बाद यात्रियों को बड़ी सहूलियत मिलेगी। बरेली तक ब्रॉडगेज मार्ग है और उत्तराखंड से बरेली तक के लिए ट्रेनों का संचालन हो रहा है। ज्यों हीं ट्रेनें कासगंज से जुड़ जाएंगी उसके बाद दक्षिण तक कई स्पेशल गाड़ियों का संचालन किया जाएगा। फिर कासगंज एक मुख्य स्टेशन की श्रेणी में शामिल होगा।

275 करोड़ रुपये की थी योजना

कासगंज-बरेली ट्रैक को तैयार करने में 275 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है। उसके बाद भी यहां अधिकारियों के बीच आर्थिक सामंजस्य न बन पाना समस्या खड़ी कर रहा था लेकिन अब इसका निस्तारण हो गया है