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देवरिया में SSI अजय के भाई SDM अरुण ने उठाया पुलिस पर सवाल, न्यायिक जांच की मांग

Published: Wed, 11 Feb 2026 01:29 PM (IST)

बस्ती में तैनात एसएसआई अजय कुमार गोंड का शव नदी से मिलने के बाद उनके भाई एडीएम अरुण गोंड ने ...और पढ़ें

मुड़ाहीह स्थित SSI अजय गोंड का घर व दरवाजे पर मायूस बैठे लोग। जागरण

मुड़ाहीह स्थित SSI अजय गोंड का घर व दरवाजे पर मायूस बैठे लोग। जागरण

HighLights

  1. एसएसआई अजय गोंड का शव नदी से बरामद हुआ।

  2. भाई एडीएम अरुण ने इसे सोची-समझी हत्या बताया।

  3. पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच की मांग।

जागरण संवाददाता, देवरिया। बस्ती जिले में तैनात जिले के मुड़ाडीह के रहने वाले एसएसआइ अजय कुमार गोंड का शव नदी से बरामद होने के झांसी में तैनात एडीएम अरुण गोंड ने इसे सोची, समझी रणनीति के तहत हत्या करार दिया है। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया और घटना की न्यायिक जांच की मांग की।

कहा कि घटना के बाद मेरा पूरा परिचार टूट गया है। उनके दो छोटे बच्चे हैं, कुछ भी करुं मैं उनके पिता की जगह नहीं ले सकता। भरी आंखों से कहा कि कोई मेरे भाई को लौटा सकता है? दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मैं चुप बैठने वाला नहीं हूं। मृत एसएसएसआइ का अंतिम संस्कार बरहज में सरयू नदी के तट पर किया गया। पार्थिव शरीर को मुखाग्नि बड़े पुत्र उत्कर्ष राज ने दी।

रामचंद्र के तीन बेटों में सबसे बड़े दिलीप हैं। वह स्वास्थ्य विभाग में रामपुर कारखाना में हेल्थ सुपरवाइजर के पद पर तैनात हैं। दूसरे नंबर के पुत्र अजय कुमार गोंड थे, वह बस्ती जनपद में एसएसआइ के पद पर तैनात थे। तीसरे नंबर के पुत्र अरुण गाेड है वह एडीएम न्यायिक के पद पर झांसी में तैनात हैं।

अजय गोंंड का परिवार बस्ती शहर में रहता था। वहां उनकी पत्नी व बच्चे रहते हैं। उनकी तैनाती बस्ती जनपद के परशुरामपुर थाना पर थी। वह पांच फरवरी को ड्यूटी पर निकले और अगले दिन उनका मोबाइल नंबर नहीं मिलने पर उनकी पत्नी की चिंता बढ़ी।

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थाना से बताया गया कि वह लापता हैं। स्वजन ने बताया कि गांव से उनका नाता था, वह छठ पूजा में घर आए थे। दरवाजे पर बैठे लोगों ने बताया कि वह काफी व्यवहारकुशल व्यक्ति थे। पढ़ने में काफी मेधावी रहे। घर आने पर आस पास के बच्चों को पढ़ने पर जोर देते थे।

पत्नी रंजिता, पुत्र 14 वर्षीय अमृत राज व 13 वर्षीय उत्कर्ष राज दरवाजे पर गुमसुम बैठे थे। दरवाजे पर दूर-दूर से पहुंचे लोग व उनके रिश्तेदार ढांढस बंधाने के लिए पहुंचे थे। सभी लोगों से उनके भाई अरुण कुमार घटना के लिए पुलिस को दोषी ठहरा रहे थे। अजय का शव घटना स्थल से कई किलोमीटर दूर अयोध्या में सरयू नदी में मिलना कई सवाल खड़ा कर रहा है।