खादी कारीगरों की कताई मजदूरी हुई दोगुनी, सांसद रमाशंकर राजभर की पहल पर केंद्र सरकार का फैसला
सांसद रमाशंकर राजभर की पहल पर केंद्र सरकार ने खादी कारीगरों और बुनकरों की समस्याओं के समाधान हेतु कई कदम ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
खादी कारीगरों की सूत कताई मजदूरी दोगुनी हुई।
कार्यशील पूंजी हेतु 4% ब्याज पर ऋण उपलब्ध।
सांसद रमाशंकर राजभर की पहल पर केंद्र का निर्णय।
जागरण संवाददाता, देवरिया। खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़े कतिनों और बुनकरों की समस्याओं को लेकर सांसद रमाशंकर राजभर की पहल पर केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। लोकसभा में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने 27 अक्टूबर को पत्र भेजकर मंत्रालय की ओर से किए गए प्रयासों की जानकारी दी है।
इसके तहत सूत कताई की मजदूरी 7.50 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये प्रति लच्छी कर दी गई है। वहीं, पात्र खादी संस्थाओं को कार्यशील पूंजी के लिए चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
सांसद रमाशंकर राजभर ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में नियम 377 के तहत खादी संस्थाओं की समस्याओं को उठाया था। उन्होंने एमएमडीए भुगतान में देरी, कच्चे माल की कमी, कार्यशील पूंजी पर ब्याज का बोझ और कतिनों व बुनकरों को कम मजदूरी मिलने का मुद्दा उठाते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था।
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि एमएमडीए योजना के तहत पात्र संस्थाओं को आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया जाता है। दस्तावेज अधूरे होने की स्थिति में भुगतान में देरी हो सकती है।
वहीं, कार्यशील पूंजी की समस्या दूर करने के लिए आईएसईसी योजना के तहत बैंकों से चार प्रतिशत रियायती ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में सूत कताई की मजदूरी दोगुनी की गई है, जबकि बुनाई की मजदूरी में भी वृद्धि की गई है। एमएमडीए के तहत मिलने वाली 35 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि में से 49 प्रतिशत हिस्सा कारीगरों और कार्यकर्ताओं को डीबीटी के माध्यम से दिया जाता है।
कच्चे माल और डिजिटल बाजार पर भी जोर
खादी उद्योग में कच्चे माल की उपलब्धता और गुणवत्ता सुधारने के लिए चित्रदुर्ग व कुत्तूर के सीएसपी का आधुनिकीकरण किया गया है। लेह में पश्मीना रोविंग संयंत्र और बीकानेर में मेरिनो ऊन बैंक स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा आठ खादी भवनों और 15 शाखाओं को डिजिटल किया गया है।
ई-खादी पोर्टल शुरू करने के साथ खादी उत्पादों को सरकारी खरीद के लिए जीईएम पोर्टल पर भी उपलब्ध कराया गया है। इससे खादी संस्थाओं और कारीगरों को बाजार से जोड़ने तथा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।