शिवभक्त जितेंद्र मिश्र अब करेंगे श्रीराम की सेवा, देखें कैसी रही उनके अनुशासन और आस्था की कहानी
भारतीय वायुसेना में चार दशक के गौरवपूर्ण सफर के बाद पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र अब रामनगरी अयोध्या में प्रभु श्रीराम की सेवा करेंगे।
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जितेंद्र मिश्र
HighLights
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र अब अयोध्या में श्रीराम सेवा करेंगे।
चार दशक भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट रहे।
धार्मिक आस्था, सादगी व गुप्त दान के लिए प्रसिद्ध।
जागरण संवाददाता, देवरिया। भाटपाररानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव की गलियों से निकलकर आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचे जितेंद्र मिश्र ने भारतीय वायुसेना में चार दशक के गौरवपूर्ण सफर के बाद अब रामनगरी में प्रभु श्रीराम की सेवा करेंगे।
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र केवल कुशल सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सादगी और परोपकार के लिए भी जाने जाते हैं। स्वजन के अनुसार वह भगवान शिव के अनन्य भक्त हैं और पुण्य व परोपकार को जीवन का हिस्सा मानते हैं।
परिवार के लोगों के मुताबिक समय मिलने पर जितेंद्र मिश्र भगवान शिव के मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए जरूर जाते हैं। सैन्य जीवन की व्यस्तता के बीच भी उनकी धार्मिक आस्था बनी रही।
गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने के साथ दान-पुण्य में भी उनकी रुचि रही है। खास बात यह है कि मदद करने के बाद उसका प्रचार करना उन्हें पसंद नहीं है। जरूरतमंदों की सहायता वह अक्सर गुप्त रूप से करते रहे हैं।
पांच वर्ष पूर्व पिता की बरखी में आए थे जितेंद्र मिश्र
जितेंद्र मिश्र का परिवार लंबे समय से दिल्ली में रह रहा है, लेकिन भोपतपुरा से उनका जुड़ाव आज भी कायम है। पिता स्व. नथुनी मिश्र के निधन के बाद ब्रह्मभोज दिल्ली स्थित आवास से हुआ था।
हालांकि करीब पांच वर्ष पहले गांव में पिता की बरखी का आयोजन किया गया और पूरे गांव को भोजन कराया गया। उनकी मां सरस्वती देवी वर्ष में दो बार गांव आती हैं और कुछ दिन यहां रहने के बाद दिल्ली लौट जाती हैं। मई 2015 में भतीजे विपिन के विवाह में वह पूरे परिवार के साथ भोपतपुरा पहुंचे थे। ग्रामीणों के लिए वह अवसर आज भी यादगार है।
छह दिसंबर 1986 से शुरू हुआ आसमान का सफर
भोपतपुरा गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना में ऊंचा मुकाम हासिल करने वाले जितेंद्र मिश्र ने छह दिसंबर 1986 को फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया और लड़ाकू विमान पायलट के रूप में सैन्य करियर शुरू किया। करीब चार दशक के सैन्य जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
फाइटर काम्बैट लीडर, इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट के रूप में उन्होंने अपनी दक्षता साबित की। उनके नाम तीन हजार घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव दर्ज है। वह वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रहे। कारगिल युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बाद आपरेशन सिंदूर के समय भी उन्होंने वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली।
18 से अधिक लड़ाकू विमानों की उड़ान
जितेंद्र मिश्र ने अपने सैन्य करियर में 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमानों से उड़ान भरी। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, पुणे, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, बेंगलुरु, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, अमेरिका और रायल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, ब्रिटेन से शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अप्रैल में एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए जितेंद्र मिश्र के जीवन की यह नई पारी सैन्य सेवा से अलग जरूर है, लेकिन जिम्मेदारी उतनी ही बड़ी है। लड़ाकू विमानों की कॉकपिट से लेकर अब श्रीराम जन्मभूमि की व्यवस्थाओं तक का यह सफर उनके अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और आस्था की अनूठी कहानी भी है।
