कौन हैं मदनमोहन पांडेय? जिन्हें मिली राम मंदिर के नए ट्रस्टी की जिम्मेदारी, अयोध्या से है पुराना नाता
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नए ट्रस्टी 74 वर्षीय मदनमोहन पांडेय अयोध्या कैंट के बलरापुर हाउस में निवास करते हैं।

राम मंदिर और मदनमोहन पांडेय
HighLights
मदनमोहन पांडेय श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नए ट्रस्टी बने।
उन्होंने 1990 से 2019 तक रामजन्मभूमि मामले की पैरवी की।
वे श्रीरामलला विराजमान और परमहंस के अधिवक्ता रहे।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नये ट्रस्टी बने 74 वर्षीय मदनमोहन पांडेय अयोध्या कैंट के बलरापुर हाउस में निवास करते हैं। साथ ही सोहावल के हाजीपुर बरसेंडी के अंबरपुर गांव के मूल निवासी हैं।
विधि स्नातक मदन मोहन पांडेय ने श्रीरामजन्मभूमि मंदिर मामले में 1990 से 2019 तक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी की। वह श्रीरामलला विराजमान के अधिवक्ता होने के साथ ही मंदिर आंदोलन के शलाका पुरुष रहे महांत रामचंद्रदास परमहंस के भी अधिवक्ता रहे।
आरएसएस व विहिप से रहा जुड़ाव
श्रीरामलला विराजमान व महांत रामचंद्र परमहंस पक्षकार थे। वह छह वर्ष तक उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रहे। इसके अतिरिक्त श्रीहरि सत्संग समिति के उपाध्यक्ष और अयोध्या में कथाकार योजना प्रशिक्षण केंद्र के पालक भी हैं।
उन्होंने साकेत महाविद्यालय से विधि स्नातक की पढ़ाई की। 1973 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्कालीन फैजाबाद नगर के नगर मंत्री रहे। इस वजह से निरंतर आरएसएस व विहिप से उनका जुड़ाव रहा। वह स्थानीय कचहरी में ही प्रैक्टिस करते हैं। सिविल मामलों के विशेषज्ञ के रूप में विख्यात हैं।
