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योगेश्वर राम मिश्रा के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव, राम मंदिर के सीईओ के दावेदार थे वाराणसी और अयोध्या के डीएम रहे मिश्रा

Published: Wed, 02 Sep 2026 07:42 PM (IST)

Yogeshwar Ram Mishra: करियर के दौरान, उन्होंने जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट के पद पर रहते हुए उत्तर प्रदेश के प्रशासन ...और पढ़ें

सेवानिवृत आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा

सेवानिवृत आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा

HighLights

  1. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए 5585 आए थे आवेदन

  2. विंध्य कॉरिडोर के निर्माण कार्य में उनके कार्यभार संभलते ही तेजी आ गई थी

डिजिटल डेस्क, अयोध्या। राम नगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में बुधवार को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का चयन हो गया। चयन समिति के सीईओ के पद के लिए तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपने की चर्चा थी। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा सीईओ नियुक्त किया गया है। सेवानिवृत आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा भी सीईओ की दौड़ में थे।

योगेश्वर राम मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के 2005 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। उन्होंने एक जनवरी, 2018 से 31 मई, 2024 तक जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया। अपने पूरे करियर के दौरान, उन्होंने जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट के पद पर रहते हुए उत्तर प्रदेश के प्रशासन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनका जन्म आठ मई 1964 को प्रयागराज हुआ है। उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा(पीसीएस) के 1988 बैच के अफसर योगेश्वर राम मिश्रा धार्मिक प्रवृति के हैं।

विंध्याचल मंडल और देवीपाटन मंडल के कमिश्नर रहे

योगेश्वर राम मिश्रा विंध्याचल मंडल और देवीपाटन मंडल के कमिश्नर भी रह चुके हैं। कमिश्नर योगेश्वर राम मिश्र को विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद का अतिरिक्त प्रभार मिला है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल विंध्य कॉरिडोर के निर्माण कार्य में उनके कार्यभार संभलते ही तेजी आ गई थी। 

अयोध्या और वाराणसी के जिलाधिकारी रहे

योगेश्वर राम मिश्रा उत्तर प्रदेश की प्रमुख धार्मिक नगरी वाराणसी और अयोध्या के जिलाधिकारी रहे है। इसके साथ ही बाराबंकी के जिलाधिकारी भी रहे। उन्हें अयोध्या के प्रशासन को संभालने का अनुभव तब मिला, जब राम मंदिर प्रोजेक्ट और अयोध्या का कायाकल्प सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं थीं। पूर्व अधिकारी का प्रशासनिक अनुभव सिर्फ रोजमर्रा के जिला प्रशासन तक ही सीमित नहीं है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और धार्मिक-पर्यटन प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े रहे हैं। जिसमें काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शामिल हैं।