फुटबॉल के मैदान से यूपी पुलिस में चयन तक, देवरिया की सोनाक्षी सिंह ने रचा सफलता का नया अध्याय
देवरिया की सोनाक्षी सिंह ने गांव की रूढ़ियों और आर्थिक चुनौतियों को पार कर फुटबॉल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने ...और पढ़ें

HighLights
तानों और मुश्किलों के बावजूद फुटबॉल में बनाई पहचान।
ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में जीते पांच स्वर्ण पदक।
फुटबॉल की बदौलत उत्तर प्रदेश पुलिस में चयन।
जागरण संवाददाता, देवरिया। गांव की गलियों से निकलकर फुटबाल के मैदान में सपने बुनने वाली सोनाक्षी सिंह ने उन तानों को अपनी ताकत बना लिया, जो कभी उनके कदम रोकने की कोशिश करते थे। लड़की होकर फुटबाल खेलने जाने पर लोगों की बातें सुननी पड़ीं, आर्थिक मुश्किलों ने भी रास्ता रोका, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा। मैदान पर पसीना बहाती रहीं और अपने खेल से पहचान बनाती गईं। जिला और मंडल स्तर से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचीं।
ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में पांच स्वर्ण पदक जीतने वाली मझौवा गांव की सोनाक्षी का अब उत्तर प्रदेश पुलिस में चयन हुआ है। उनकी कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि उस नई पीढ़ी की बेटियों के आत्मविश्वास की कहानी है, जो समाज की सोच से आगे बढ़कर अपनी पहचान खुद गढ़ना चाहती हैं।
लोग उड़ाते थे मजाक
मझौवा गांव निवासी विजय सिंह की पुत्री सोनाक्षी ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज, कुर्मीपट्टी से की। कक्षा सात में पढ़ते समय विद्यालय के खेल परिसर में महिला फुटबाल टीम को अभ्यास करते देख उनके मन में भी फुटबाल खेलने की इच्छा जागी। सोनाक्षी ने प्रधानाचार्य हरेंद्र सिंह से अनुमति ली और पढ़ाई के साथ मैदान में नियमित अभ्यास शुरू कर दिया।
शुरुआत में यह राह आसान नहीं थी। गांव में लड़की होकर फुटबाल खेलने जाने पर कुछ लोग उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन सोनाक्षी ने दूसरों की बातों को अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया। उन्होंने तय किया कि जवाब शब्दों से नहीं, अपने प्रदर्शन से देंगी।
कोच जय कुमार राव के मार्गदर्शन में सोनाक्षी ने अपने खेल को लगातार निखारा। जिला, मंडल और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिभा दिखाई। खेल के मैदान पर हासिल की गई उपलब्धियों ने उनके लिए आगे बढ़ने के रास्ते खोले।
खेल- नई संभावनाओं का रास्ता भी
उत्तर प्रदेश पुलिस में चयन की यह उपलब्धि बताती है कि खेल केवल मैदान में जीत-हार तक सीमित नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और भविष्य की नई संभावनाओं का रास्ता भी बन सकता है। सामान्य परिवार से आने वाली सोनाक्षी के लिए खेल की तैयारी करना और दूसरे प्रदेशों में प्रतियोगिताओं में भाग लेना चुनौतीपूर्ण था। खेल किट, यात्रा और अन्य जरूरी खर्चों की व्यवस्था कई बार मुश्किल हो जाती थी। ऐसे समय में कॉलेज के प्रबंधक सुजीत प्रताप सिंह ने उनका सहयोग किया।
सफलता से बदली पहचान, दूसरी बेटियों को दिया संदेश
सोनाक्षी का सफर उन लड़कियों के लिए खास संदेश रखता है, जिनकी प्रतिभा सामाजिक तानों, संसाधनों की कमी या अवसरों के अभाव में दब जाती है। उन्होंने दिखाया कि किसी लड़की के सपनों की सीमा समाज की बनाई धारणाएं तय नहीं कर सकतीं। जरूरी है कि उसे परिवार का भरोसा, सही मार्गदर्शन और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले।
