बरहज मॉडल की देश में चर्चा, गीले कचरे और गोबर से रोजगार; महिलाओं को हर महीने मिल रहा 4 से 8 हजार मानदेय
नगर पालिका गौरा-बरहज ने कचरे से रोजगार का अनूठा मॉडल विकसित किया है, जहाँ स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ गीले ...और पढ़ें
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बरहज मॉडल की चर्चा।
HighLights
गौरा-बरहज में कचरे से रोजगार का अनूठा मॉडल।
महिलाएँ गीले कचरे से खाद, गोबर से पेंट बना रहीं।
समूह की महिलाएँ प्रतिमाह 4 से 8 हजार कमा रहीं।
जागरण सूत्र, बरहज(देवरिया)। स्वच्छता में नंबर वन इंदौर की तर्ज पर नगर पालिका परिषद गौरा-बरहज ने कचरे से रोजगार का ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जिसकी चर्चा अब प्रदेश में होने लगी है। पालिका के इस नवाचार से कूड़ा सोना बन गया है और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर हर माह हजारों कमा रही हैं।
नगर पालिका द्वारा गीले कचरे से वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार करने का प्रशिक्षण महिलाओं को दिया गया। परिणाम यह रहा कि समूह की महिलाओं ने पिछले तीन माह में ही खाद की बिक्री से 3.20 लाख रुपये की आय अर्जित की है।
समूह की अध्यक्ष संगीता जायसवाल ने बताया कि जो महिलाएं पहले घरों में बैठी रहती थीं, आज उन्हीं के हाथों में घर में ही रोजगार है। आर्थिक स्थिति सुधरने से घरेलू कलह भी कम हुई है। आशा जायसवाल, संजना देवी, नीलू यादव, अंजलि निषाद और रोशनी वर्मा ने बताया कि सामान्य कार्य पर 4000 रुपये और बेहतर कार्य करने पर 6 से 8 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय हो रही है। नगर में ही रोजगार मिलने से महिलाएं बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि जब घर में सबके हाथ में काम होगा तो हिंसा घटेगी और खुशहाली आएगी।
नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने बताया कि इस कार्य से जुड़ी प्रत्येक महिला को 4000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। इसके अलावा कान्हा गौशाला में गाय के गोबर से प्राकृतिक इको-फ्रेंडली पेंट का उत्पादन भी इन्हीं महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ नगर को स्वच्छ बनाना नहीं, बल्कि कचरा प्रबंधन को आजीविका से जोड़ना है। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम सुंदर जायसवाल के सहयोग से पालिका स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता में लगातार नवाचार कर रही है। आने वाले समय में यह गौरा-बरहज मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा बनेगा।
