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यहां नौकरी से छुट्टी लेकर गांव लौटते हैं बड़े-बड़े अफसर, यूपी के देवरिया में 52 सालों से संजोए हैं रामलीला की विरासत

Published: Tue, 20 Oct 2026 03:21 PM (IST)

देवरिया के बड़का गांव में 52 साल से चली आ रही रामलीला में सरकारी नौकरीपेशा लोग छुट्टी लेकर अभिनय करते हैं।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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HighLights

  1. देवरिया के बड़का गांव में 52 साल से रामलीला मंचन।

  2. सरकारी नौकरीपेशा लोग छुट्टी लेकर करते हैं रामलीला में अभिनय।

  3. दशरथ मरण और भरत मिलाप के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक किया।

जागरण संवाददाता, देवरिया। बड़का गांव में दशरथ मरण और भरत मिलाप की लीला देख श्रद्धालु भावुक हो उठे। पिछले 52 साल से यहां रामलीला मंच सजता आ रहा है। शुरुआत नब्बे लाल गुप्ता, अवधेश पाठक, शत्रुघ्न यादव, धनेश पाठक और स्वतंत्र पाठक ने की थी। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल मंच नहीं, गांव की एकता का प्रतीक है।

खास बात यह है कि मंच के अधिकांश पात्र सरकारी नौकरी में हैं। कोई शिक्षक है तो कोई रेलवे और पुलिस में। साल भर घर न आ पाएं, लेकिन नवरात्र में छुट्टी लेकर गांव पहुंचते हैं और रात-रात भर रिहर्सल कर लीला सजाते हैं।

गुरुवार रात राम बने अभय पाठक ने जब पिता के वचन को मानकर वन जाने की बात कही तो पूरा पंडाल भावुक हो गया। दशरथ की भूमिका में रेलवे सुरक्षा में तैनात गिरजेश यादव थे। राम को वनवास का आदेश देते समय उनका कंठ भर आया। दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

भरत मिलाप के प्रसंग में कलाकार ने कहा कि संसार में किसी को कैकई जैसी माता न मिले। आज जमीन के छोटे टुकड़े के लिए भाई-भाई में हत्या हो रही है, जबकि भरत ने भाई के लिए राजपाट छोड़कर 14 साल तक चरण पादुका की सेवा की। युवाओं को भरत से त्याग सीखना चाहिए।

विभीषण की भूमिका निभा रहे असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तारकेश्वर कनौजिया ने कहा कि विभीषण सत्यवादी थे, जो अंत तक रावण को समझाते रहे। वशिष्ठ की भूमिका में रेलवे कर्मी दुर्गेश पाठक 12 महीने नौकरी कर 10 दिन मंच पर सेवा देते हैं। लक्ष्मण बने निर्भय पाठक ने भरत की सेना देखकर क्रोध जताया तो राम ने समझाया- धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी, आपत काल परखिए चारी।

इस दौरान व्यास अंकित पाठक, अमित दीक्षित 'शैलू', शिवम पाठक, राज कुमार कुशवाहा, सुजीत यादव, बसंत पाठक, करन, अर्जुन मौर्य, धर्मेंद्र भट्ट, शैलेन्द्र गुप्ता, भूपेंद्र, संजीव आदि लोग मौजूद रहे।

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