सर्दियों में पशुओं के हरे चारे का समाधान, देवरिया में पशुपालकों को पशु चिकित्सालयों से मिलेगा जई का बीज
पशुपालन विभाग सर्दियों में पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जई का बीज उपलब्ध करा रहा ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
पशुपालन विभाग जई का बीज उपलब्ध करा रहा है।
जई से दिसंबर से मार्च तक हरा चारा मिलेगा।
पौष्टिक जई दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।
संवाद सूत्र, बैतालपुर। सर्दियों में पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालन विभाग जई का बीज उपलब्ध करा रहा है। पशुपालक इसे अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से प्राप्त कर सकते हैं। जई में प्रोटीन, कैल्शियम और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पशुओं के पोषण और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक हैं।
पशुधन प्रसार अधिकारी निशिकांत तिवारी ने बताया कि जई की बोआई के लिए 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक का समय उपयुक्त है। प्रति एकड़ करीब 40 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। खेत की दो से तीन बार जुताई करने के बाद बुवाई करनी चाहिए। बेहतर उत्पादन के लिए प्रति एकड़ आठ से 10 टन गोबर की खाद और 40 किलोग्राम डीएपी का प्रयोग करें।
कतारों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखें और बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली सिंचाई करें। उन्होंने बताया कि बोआई के 55 से 60 दिन बाद जई की पहली कटाई की जा सकती है। कटाई जमीन से चार से पांच इंच ऊपर करनी चाहिए। इसके बाद प्रति एकड़ 20 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग कर सिंचाई करने से दूसरी और तीसरी कटाई भी ली जा सकती है। इससे दिसंबर से मार्च तक पशुओं के लिए लगातार पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध हो सकता है।
