जागरण संवाददाता, देवरिया : शहर में ऐसे तो जर्जर भवनों की संख्या सौ से ज्यादा हैं, लेकिन नगर पालिका प्रशासन के आंकड़ों में इनकी संख्या 68 है। भवनों को चिह्नित करने के बाद भी नगरपालिका की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। यह भवन कभी भी ध्वस्त हो सकते हैं।

नगर पालिका के रिकार्ड में शहर में करीब 22 हजार मकान हैं। एक लाख 29 हजार आबादी निवास करती है। बहुत से ऐसे भवन हैं, जो कई दशक पुराने हो चुके हैं। उनके प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं। सर्वाधित जर्जर भवन मुंशी गोरखनाथ टोला में है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल कालोनी में कुछ ऐसे भवन हैं, जहां रहना खतरे से खाली नहीं है। बारिश में इन भवनों से पानी टपकता है और उन भवनों पर घासफूस भी उग गए हैं। बावजूद इसके लोग उन भवनों में निवास कर रहे हैं। लोगों के निवास करने के साथ ही कुछ मकानों में दुकानें भी संचालित हो रही हैं। नई बाजार में एक तीन मंजिला भवन ऐसा है, जिसके गिरने से आसपास के कई मकान को नुकसान हो सकता है। ऐसे मकानों को नगर पालिका के कर समाहर्ताओं के माध्यम से चिह्नित किए गए हैं। इन मोहल्लों में भवन किए गए हैं चिह्नित शहर के अबूबकर नगर में पांच, रामनाथ देवरिया में छह, रौनियारी गली में छह, मुंशी गोरखनाथ में 15, सोमनाथ नगर में छह, आचार्य रामचंद्र शुक्ल में सात, चकियंवा में एक, न्यू कालोनी में चार, राघव नगर में तीन, बांस देवरिया, रामगुलाम टोला में तीन-तीन व नई बाजार में नौ भवन जर्जर स्थिति में चिह्नित किए गए हैं। जान हथेली पर लेकर लोग कर रहे निवास

शहर में जर्जर भवनों को भले ही चिह्नित कर लिया गया है, लेकिन उसमें निवास करने से लोग पीछे नहीं हट रहे हैं। कई लोगों के पास धन का अभाव है। दूसरे ऐसे लोग निवास कर रहे हैं, जिनका मामला न्यायालय में चल रहा है। इसलिए वह खाली नहीं कर रहे हैं, ताकि कब्जा हटने के बाद उस मकान से हाथ धोना पड़ सकता है। इस तरह के मामले सर्वाधिक हैं।

- यह होना चाहिए इंतजाम भवनों को चिह्नित करने के बाद उन भवनों पर जर्जर होने का बोर्ड लगना चाहिए, ताकि लोग भी उस मकान की तरफ जाने के दौरान सावधान रहें। साथ ही मकान खाली कराने के लिए नगर पालिका प्रशासन को आगे आना चाहिए। जर्जर भवनों को चिह्नित करा लिया गया है। अधिक जर्जर भवन विवादित हैं। ध्वस्तीकरण के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। रोहित सिंह

अधिशासी अधिकारी

नगर पालिका, देवरिया

Edited By: Jagran