देवरिया: देवरिया जिले के बरहज तहसील के सुदूर कसिली गांव की गलियों में अयोध्या में बनने वाले भव्य राममंदिर की गूंज है। ग्रामवासी मुदित हैं। मिठाई बांटकर खुशियां मना रहे हैं। वजह गांव के लाल नृपेंद्र मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति का चेयरमैन बनाया जाना है। इससे यह गांव अब देश-दुनिया के नक्शे पर आ गया है। नृपेंद्र मिश्र, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव भी रहे हैं।

नृपेंद्र मिश्र भले ही जीवन भर बाहर रहे, लेकिन गांव के लोगों के जेहन में उनकी सदाशयता, शालीनता व विद्वता की छाप है। अपने गांव के एक सपूत को भगवान श्रीराम की सेवा के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर बड़े-बुजुर्ग, सभी खुश हैं। लोगों को तनिक भी अंदाजा न था कि कसिली गांव का नाता अयोध्या में भगवान श्रीराम के बहुप्रतीक्षित मंदिर के निर्माण से जुड़ेगा।

नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण समिति का चेयरमैन बनाने की खबर गांव के लोगों को टीवी व अन्य माध्यमों से देररात मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। युवा शुभम मिश्र, रत्नेश मिश्र, विकास मिश्र, रामसुभग मिश्र, रविकांत मिश्र, रामभद्र मिश्र, प्रवीण तिवारी, रविशंकर तथा नृपेंद्र मिश्र के पड़ोसी आदित्यनारायण, दीपक मिश्र ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि सौभाग्य की बात है कि नृपेंद्र मिश्र जैसी हस्ती इसी धरती के लाल हैं।

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फूले नहीं समा रहे श्यामलाल

उनके पैतृक मकान की देखभाल करने वाले बुजुर्ग श्यामलाल भी फूले नहीं समा रहे हैं। कहते हैं, साहब को मंदिर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर गर्व महसूस हो रहा है।

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शुरू से मेधावी रहे नृपेंद्र

कसिली गांव के निवासी व नृपेंद्र मिश्र के सीनियर रहे गन फैक्ट्री कानपुर से सेवानिवृत्त राजेंद्र मिश्र कहते हैं कि वह डीएवी कालेज कानपुर में एक साल उनसे सीनियर थे। पुरानी यादें साझा करते हुए कहते हैं कि नृपेंद्र शुरू से मेधावी रहे। कालेज में उनकी पूछ थी। काफी सहज भी रहे।

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हमें भाई पर नाज

वाराणसी के पूर्व सांसद व चचेरे भाई राजेश मिश्र कहते हैं कि हमें अपने भाई नृपेंद्र मिश्र पर नाज है। उन्होंने कसिली का नाम दुनिया में रोशन किया है। करीब चार माह पहले मेरी बात हुई थी। परिवार के बारे में हालचाल पूछ रहे थे।

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अंग्रेजी हुकूमत में दादा थे अफसर

नृपेंद्र मिश्र के दादा चंद्रशेखर मिश्र अंग्रेजी हुकूमत में बड़े अफसर थे। लोग उन्हें डिप्टी साहब के नाम से बुलाते थे। खंडहर बना पैतृक आवास

नृपेंद्र मिश्र कई दशक से गांव नहीं आए। पूरा परिवार दिल्ली में रहता है। इस वजह से उनका पैतृक आवास खंडहर में तब्दील हो गया है।

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प्रोफाइल

- नृपेंद्र मिश्र 1967 बैच के आइएएस।

- पिता शिवेश चंद्र मिश्र बिजली विभाग में आडिटर थे।

- दो भाइयों में नृपेंद्र मिश्र छोटे व सुशीलचंद्र मिश्र बड़े हैं।

- शिक्षा वाराणसी, कानपुर व प्रयागराज से हुई।

- पुत्र साकेत मिश्र आइपीएस अधिकारी थे, लेकिन इस्तीफा दे दिया। इस वक्त पूर्वांचल विकास बोर्ड के सलाहकार हैं।

Posted By: Jagran

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