देवरिया: डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट के संयोजन में दीवानी न्यायालय परिसर में बैठक कर शुक्रवार को राम प्रसाद बिस्मिल को उनके जन्मदिन पर याद किया गया और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।

अध्यक्ष सुभाष चंद्र राव ने कहा कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल देश की अनमोल धरोहर थे। आज वह हम लोगों के बीच नहीं है लेकिन अपने कार्यों के चलते वो हमेशा लोक में जीवित रहेंगे। कहा कि उनका त्याग और बलिदान हमेशा यादव किया जाता रहेगा। उनका जन्म 11 जून 1897 को हुआ था। अंग्रेजों का विरोध करते हुए वह 19 दिसंबर 1927 को फांसी के फंदे को वह गले का हार बना कर हंसते हुए झूलकर शहीद हो गए। आनंद राय ने कहा कि पूरा देश आज उनको नमन कर रहा है। ऐसे वीर सपूत को पैदा करने वाले माता पिता भी नमन योग्य हैं। वीर सपूतों के चलते ही भारत मां को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया जा सका। यहां मुख्य रूप से तरुण मणि, अरविद साहनी, राम श्रृंगार यादव, काजी मो. आमिर, अनिल कुमार सिंह, सुरेन्द्र राव, सत्य नारायण यादव, राधेश्याम पाठक, रजनीकांत पांडेय, श्याम नारायण तिवारी जटाशंकर सिंह आदि मौजूद रहे। समाधि स्थल पर माल्यार्पण कर किया याद

बरहज: काकोरी कांड के महानायक अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर शुक्रवार को बरहज आश्रम में स्थापित उनके समाधि स्थल पर माल्यार्पण कर याद किया गया।

अनंत पीठ के पीठाधीश्वर आ†जनेय दास ने कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे। जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी। सच्चे राष्ट्रवादी थे। बाबा राघवदास के विचारों से प्रभावित थे। फांसी के पूर्व बाबा जी से मिलने की इच्छा जताई थी, जब बाबा जी मिले तो बाबा के आंखों में आंसू थे इस पर बिस्मिल ने कहा कि बाबा आप तो कहते हैं कि आत्मा अमर है तो फिर ये मुझे कहां मार सकते हैं। फांसी के बाद राप्ती तट पर अंतिम संस्कार के बाद बाबा अपने साथ उनकी अस्थियां एक कलश में लाकर यहां समाधि बनाई। बरहज में काकोरी कांड के क्रांतिवीर की समाधि बना कर धन्य है। अंश फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष अभय पांडेय ने कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल महान राष्ट्र भक्त थे। इस अवसर पर विनय मिश्रा,ओम प्रकाश दुबे, राकेश पांडेय, कुनाल यादव, प्रदीप, अनुपम, अनमोल, अभिनव, आर्या मौजूद रहे।

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