जागरण संवाददाता, चित्रकूट : तुलसी कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां में वैज्ञानिक किसानों के हित को ध्यान में रखकर लगातार शोध कर रहे हैं। बुंदेलखंड की कम वर्षा को ध्यान में रख कम पानी में अच्छी पैदावार हो इसके लिये गेहूं की कुछ प्रजातियां तैयार की गई हैं।

जायद की फसल हो या रबी या खरीफ की फसलें हो जो भी उन्नत किस्म के बीज बुंदेलखंड के लिये आवश्यक होते हैं वही बीज किसानों के लिये विज्ञान केंद्र की ओर से उपलब्ध कराये जाते हैं इसी कड़ी में दो वर्षों से चल रहे बायोवर्सिटी परियोजना के अन्तर्गत कार्य कर रहे सत्यम चौरिहा गेहूं की 14 प्रजातियों को 9 गांवों में ( बालापुर, चकौंध, छेछरिहा, बसिला, बनाड़ी, गनीवां, कुई, बछरन, दढि़या) लगातार दो वर्ष से प्रयोग कर रहे थे। जिसमें उन्होंने पाया कि गेहूं की 14 प्रजातियों में से तीन प्रजातियां जीडब्लू-366, जीडब्लू-273 और जीएसडब्लू-18 बुंदेलखंड के लिये उपयुक्त हैं इन प्रजातियों का विशेष गुण ये है कि कम पानी में ज्यादा उत्पादन किसान ले सकते हैं तथा सूखा प्रतिरोधी हैं इनकी औसत उपज एक हेक्टेयर में 35-40 कुंतल उत्पादन किसान ले सकते हैं। इस शोध कार्य के लिए सत्यम चौरिहा को फाइटोकेमेस्ट्री सोसायटी नई दिल्ली द्वारा आयोजित सेमिनार में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार दिया गया। इस पुरस्कार के लिए किसानों व वैज्ञानिकों ने चौरिहा को बधाई दी।

By Jagran