रंग-बिरंगे मुखौटे, पारंपरिक नृत्य और रामकथा… चित्रकूट के राघव प्रयाग घाट पर सजा अनूठा मंच, थाईलैंड की खोन शैली में रामलीला
चित्रकूट के राघव प्रयाग घाट पर सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का शुभारंभ हुआ। इसमें थाईलैंड के कलाकारों ने खोन ...और पढ़ें

अंतरराष्ट्रीय रामलीला उत्सव में सीता हरण का मंचन करते थाईलैंड के कलाकार। स्रोत-आयोजक
HighLights
राघव प्रयाग घाट पर अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का आगाज
थाईलैंड की खोन शैली में सीता हरण, राम-रावण युद्ध का मंचन
यूनेस्को मान्यता प्राप्त खोन कला ने साझा रामकथा परंपरा दिखाई
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मंदाकिनी की कलकल धारा, चित्रकूट की तपोभूमि का आध्यात्मिक परिवेश और घाट पर गूंजती रामकथा। प्रभु श्रीराम की वनवास स्थली चित्रकूट में मंगलवार को भक्ति और अंतरराष्ट्रीय संस्कृति का ऐसा संगम सजा कि थाईलैंड की पारंपरिक खोन नृत्य-नाट्य शैली में रामायण के प्रसंग जीवंत हो उठे।
राघव प्रयाग घाट पर सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन विदेशी कलाकारों ने मुखौटों, रंग-बिरंगी वेशभूषा और भावपूर्ण नृत्य के माध्यम से सीता हरण तथा राम-रावण युद्ध का मंचन किया।

अंतरराष्ट्रीय रामलीला का मंचन करते थाईलैंड के कलाकार। आयोजक
मंदाकिनी तट पर सजी यह रामलीला चित्रकूट की उस सांस्कृतिक परंपरा को भी रेखांकित करती है, जहां रामकथा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि लोकजीवन और आध्यात्मिक चेतना का आधार है। थाईलैंड की खोन शैली में रामायण का मंचन भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच साझा रामकथा परंपरा की झलक लेकर आया।

मंदाकिनी तट में अंतरराष्ट्रीय रामलीला उत्सव दीप जलाकर शुभारंभ करते अतिथि। स्रोत-आयोजक
शुभारंभ सतना सांसद गणेश सिंह, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, संतोषी अखाड़ा के महांत रामजी दास और कामदगिरि प्रमुख द्वार के उत्तराधिकारी संत मदनगोपाल दास ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
19 अक्टूबर तक मंदाकिनी के राघव प्रयाग घाट पर श्रीरामलीला उत्सव
प्रभु श्रीराम की तपोभूमि में मंगलवार से सात दिन तक रामकथा के प्रसंगों के साथ विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत का संगम देखने को मिल रहा है। मंदाकिनी तट स्थित राघव प्रयाग घाट पर 13 से 19 अक्टूबर तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ थाईलैंड और रूस की मंडलियां भी रामलीला का मंचन कर रही हैं।
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल ये शैली
मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित उत्सव में थाईलैंड की प्रसिद्ध खोन नृत्य शैली विशेष आकर्षण है। मुखौटों, पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य-नाट्य के माध्यम से रामकथा के प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। खोन थाईलैंड की पारंपरिक नृत्य-नाट्य कला है, जिसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया है।
आंध्र और तेलंगाना की मंडलियां भी होंगी शामिल
रूस की मंडली भी रामलीला के विभिन्न प्रसंगों की प्रस्तुति देकर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने ला रही। भारत के विभिन्न हिस्सों से आने वाली मंडलियां भी अपनी क्षेत्रीय कला परंपराओं के साथ उत्सव में शामिल हो रहीं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की मंडलियां यक्षगान और भागवतम् शैली में रामकथा के प्रसंगों को मंच पर उतारेंगी। अलग-अलग क्षेत्रों की संगीत, नृत्य और अभिनय परंपराओं के माध्यम से दर्शकों को रामलीला के विविध रूप देखने का अवसर मिलेगा।
