जागरण संवाददाता, चित्रकूट : प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में श्रद्धालु अब पौराणिक स्थल हनुमानधारा तक रोप-वे के माध्यम से पहुंच सकेंगे। दीपदान मेला से पहले उद्घाटन के बाद ही कुछ कारणों से बंद रोप-वे को शुक्रवार को आमजन के लिए खोल दिया गया। संचालक कंपनी दामोदर रोप-वे इंफ्रा लिमिटेड के अधिकारियों ने गोलोकवासी राजगुरु स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य रामानुजाचार्य की जयंती पर पूजा-अर्चना करके शुरुआत की।

शुक्रवार को रोप-वे पर सबसे पहले राजगुरु स्वामी बदरी प्रपन्नाचार्य, सतना चित्रकूट विधायक नीलांशु चतुर्वेदी, हनुमानधारा मंदिर के अध्यक्ष मयंक चतुर्वेदी, डीआरआइ के संगठन सचिव अभय महाजन और कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रवण अग्रवाल ने सफर किया। चोटी पर पहुंचकर हनुमानधारा में दर्शन किए। विधायक ने कहा कि रोप-वे के संचालन से श्रद्धालुओं को अब हनुमान जी के दर्शन करने में आसानी होगी। कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने बताया कि हनुमानधारा मंदिर की 618 सीढि़यां चढ़कर अभी तक श्रद्धालुओं को दर्शन मिलते थे। अब सुरक्षित और आसान तरीके से प्रभु दर्शन मिलेंगे। रोप-वे पर लगीं ट्राली आधुनिक हैं, जो बेहद सुरक्षित होंगी। रोप-वे शुरू होने से यहां प्रतिदिन पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। महज पांच मिनट में पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर भगवान हनुमान के दर्शन कर सकेंगे। एक मिनट को रोप-वे बीच में रोका जाएगा, जिससे श्रद्धालु चित्रकूट के नैसर्गिक नजारों का भी दीदार कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि चित्रकूट में इससे पहले कामदगिरि परिक्रमा पथ स्थित लक्ष्मण पहाड़ी पर भी रोप-वे का संचालन हो रहा है।

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ये है रोप-वे की खासियत

- 500 श्रद्धालु प्रति घटे में आ-जा सकेंगे।

- 302 मीटर लंबाई है रोप-वे के सफर की।

- 12 की संख्या में लगी हैं ट्रालियां

- 06 लोग एक ट्रॉली पर एक साथ बैठ सकेंगे।

- 130 रुपये होगा प्रति व्यक्ति का किराया।

- 83 रुपये एक बच्चे का होगा किराया।

- 08 बजे सुबह से रात आठ बजे तक संचालन।

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राजनीतिक दांव-पेच में फंसा था रोप-वे

देश के कोने-कोने से चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं को रोप-वे दो माह पहले ही मिल गया होता, लेकिन राजनीतिक दांव-पेच भारी पड़े। सूत्र बताते हैं कि उद्घाटन सतना के भाजपा सासद गणेश सिंह ने किया था। इसको लेकर चित्रकूट के काग्रेस विधायक नीलांशु चतुर्वेदी नाराज थे, क्योंकि हनुमानधारा मंदिर उनके परिवार का है। उनके परिवार से अनुबंध के बाद ही यहां रोप-वे का निर्माण हुआ था।

Edited By: Jagran