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Chitrakoot में पितृ विसर्जनी अमावस्या पर चित्रकूट में उमड़ी श्रद्धा, मंदाकिनी में स्नान कर पितरों को किया तर्पण

Published: Sat, 10 Oct 2026 03:59 PM (IST)

चित्रकूट में पितृ विसर्जनी अमावस्या पर मंदाकिनी तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने स्नान कर पितरों को ...और पढ़ें

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HighLights

  1. चित्रकूट में पितृ विसर्जनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी

  2. मंदाकिनी नदी में स्नान कर पितरों को श्रद्धापूर्वक तर्पण दिया

  3. पिंडदान और दान-पुण्य से पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। किसी के हाथों में तर्पण के लिए जल से भरा पात्र था तो कोई पुरोहित के मंत्रोच्चार के बीच अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान कर रहा था। रामघाट पर मंदाकिनी की लहरों के बीच आस्था, श्रद्धा और परंपरा का ऐसा संगम दिखा कि भोर होते ही घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही तेज हो गई।

पितृ विसर्जनी अमावस्या पर शनिवार को देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में स्नान कर पितरों को तर्पण दिया। इसके बाद दान-पुण्य और कामदगिरि की परिक्रमा कर पूर्वजों की आत्मा की शांति तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

भगवान श्रीराम की तपोभूमि में रामघाट स्थित दिगंबर अखाड़ा भरत मंदिर के महांत दिव्यजीवन दास पितृ विसर्जनी अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व बताते हुए कहते हैं कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने मंदाकिनी तट पर अपने पिता राजा दशरथ के निमित्त श्राद्ध और पिंडदान किया था। इसी आस्था से जुड़कर यह पर्व हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को चित्रकूट खींच लाता है।
पितृपक्ष के अंतिम दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक तर्पण देकर विदाई देते हैं। रामघाट पर कई परिवारों ने पुरोहितों की सहायता से विधि-विधान के साथ श्राद्ध और पिंडदान कराया। मध्य प्रदेश के रीवा से आए गोकुल प्रसाद के लिए रामघाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पिता की स्मृतियों से जुड़ा स्थान भी है।

उन्होंने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से लगातार यहां आकर अपने पिता का पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। उनके अनुसार, चित्रकूट की धार्मिक मान्यता और भगवान श्रीराम से जुड़ी परंपरा उन्हें हर साल यहां आने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना उनके परिवार की आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सागर से राम कुमार, छतरपुर से लालमन, महोबा से छितानीराम जैसे अनेक श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने के लिए यहां पहुंचे। किसी ने पुरोहितों के मार्गदर्शन में धार्मिक कर्मकांड पूरे किए तो किसी ने मंदाकिनी में स्नान के बाद जल अर्पित कर पितरों की शांति की कामना की। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने दान-पुण्य भी किया।

रामघाट से कामदगिरि तक बढ़ी चहल-पहल

अमावस्या पर रामघाट के साथ मंदाकिनी तट और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर भी श्रद्धालुओं की चहल-पहल रही। स्नान और तर्पण के बाद श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा के लिए पहुंचे। धार्मिक आस्था के इस पर्व पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए रामघाट से परिक्रमा मार्ग तक पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए। भीड़ और यातायात के दबाव को देखते हुए वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए भी इंतजाम किए गए।

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि अमावस्या मेले में करीब चार लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। अंतिम संख्या की पुष्टि शाम तक हो पाएगी। पितृ विसर्जनी अमावस्या पर मंदाकिनी के तट पर उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर दिखाया कि चित्रकूट की धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों को अपने पूर्वजों की स्मृतियों और आस्था से जोड़े हुए हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को निभाने का अवसर भी रहा।

चित्रकूट में पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को मिलती है शांति

तुलसीगुफा के महांत मोहित दास ने बताया कि आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु चित्रकूट की पावन नगरी पर पहुंचे हुए हैं। स्नान और दान पुण्य पिंडदान की प्रक्रिया शुरू है। बुदेलखंड सहित कानपुर, हमीरपुर, दिल्ली, झांसी व मध्य प्रदेश से आने वाले भक्त अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करते हैं। मान्यता है कि यहां पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।