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इनोवेशन चैलेंज में पॉलिटेक्निक छात्र का दिखा टैलेंट: रिमोट न इंसानी नियंत्रण...बाधा आते ही रास्ता बदल लेता है रोबोट

Published: Fri, 02 Oct 2026 04:47 PM (IST)

राजकीय पॉलिटेक्निक बरगढ़ के छात्रों ने एक ऐसा रोबोट बनाया है जो बिना रिमोट या मानवीय नियंत्रण के बाधाओं को ...और पढ़ें

रोबोट को देखते हुए मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी । आयोजक

रोबोट को देखते हुए मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी । आयोजक

HighLights

  1. राजकीय पॉलिटेक्निक बरगढ़ के छात्रों ने रोबोट बनाया

  2. यह रोबोट बाधाओं को पहचानकर स्वतः रास्ता बदलता है

  3. चित्रकूट इनोवेशन चैलेंज में इसे प्रथम स्थान मिला

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। सामने कोई वस्तु आ जाए तो क्या कोई रोबोट खुद रुक सकता है? पीछे हटकर दूसरी दिशा में मुड़ सकता है? राजकीय पालिटेक्निक बरगढ़ के विद्यार्थियों ने इसका जवाब अपने बनाए रोबोट से दिया है। विद्यार्थियों ने ऐसा आब्स्टेकल अवायडिंग रोबोट तैयार किया है, जिसे चलाने के लिए न रिमोट की जरूरत है और न लगातार इंसानी नियंत्रण की। सामने बाधा आते ही रोबोट सेंसर की मदद से उसकी दूरी मापता है, खुद रुकता है, पीछे हटता है और दाएं या बाएं दिशा बदलकर आगे बढ़ जाता है।

सेवा संकल्प अभियान-2026 के तहत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) मानिकपुर में आयोजित जनपद स्तरीय चित्रकूट इनोवेशन चैलेंज में इस मॉडल ने प्रथम स्थान हासिल किया। माडल तैयार करने वाली टीम में डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष के छात्र प्रतीक सिंह के साथ सतीश पाल, मयंक विश्वकर्मा, भूपेंद्र और शुभम मिश्रा शामिल रहे।


विद्यार्थियों ने इसे प्राचार्य हिमांशु शुक्ल, डा. दीपेंद्र मिश्र और इंजीनियर रोहित पटेल के मार्गदर्शन में तैयार किया। चित्रकूट इनोवेशन चैलेंज में प्रस्तुत इन माडलों ने यह भी दिखाया कि तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं और रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखकर उपयोगी तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

सेंसर खुद पहचानता है सामने की बाधा

रोबोट की खासियत उसका सेंसर आधारित स्वचालित संचालन है। इसमें ओपन-सोर्स माइक्रोकंट्रोलर बोर्ड को नियंत्रण इकाई बनाया गया है। साथ ही अल्ट्रासोनिक डिस्टेंस सेंसर लगाया गया है। यह सेंसर ध्वनि तरंगों की मदद से सामने मौजूद वस्तु की दूरी मापता है। सेंसर करीब दो सेंटीमीटर से 400 सेंटीमीटर तक सामने मौजूद वस्तु की दूरी का पता लगा सकता है। जब सेंसर से भेजी गई ध्वनि तरंगें किसी वस्तु से टकराकर वापस लौटती हैं तो सिस्टम उस आधार पर वस्तु की दूरी की गणना करता है। करीब 20 से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बाधा मिलने पर रोबोट प्रोग्राम किए गए निर्देश के अनुसार प्रतिक्रिया शुरू कर देता है।

ऐसे बदलता है रास्ता

बाधा सामने आने पर सेंसर माइक्रोकंट्रोलर को संकेत भेजता है। इसके बाद रोबोट पहले रुकता है और फिर पीछे हटकर दाएं या बाएं दिशा में मुड़ता है। बाधा से रास्ता साफ होने पर वह दोबारा आगे बढ़ जाता है। इसके लिए मोटर ड्राइवर, चार पहियों वाली बीओ मोटर चेसिस और लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया है। विद्यार्थी प्रतीक सिंह के मुताबिक मॉडल तैयार करने का उद्देश्य ऐसी तकनीक को विकसित करना है, जिसमें मशीन अपने आसपास की बाधाओं को पहचानकर बिना लगातार मानवीय निर्देश के अपनी दिशा तय कर सके।

600 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

इनोवेशन चैलेंज के नोडल अधिकारी एवं प्रधानाचार्य दुष्यंत कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रतियोगिता में जिलेभर के करीब 600 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। 25 विद्यार्थी टीमों ने 10 नवाचार माडल प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने तकनीक के जरिए अलग-अलग समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए। गोस्वामी तुलसीदास राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने नदी के पानी को साफ करने वाला यंत्र बनाया। शिवरामपुर आइटीआइ के विद्यार्थियों ने ट्रांसमिशन लाइन फॉल्ट लोकेटर तैयार किया, जबकि मानिकपुर आइटीआइ के विद्यार्थियों ने इंसुलेशन टेस्टिंग टर्मिनल का मॉडल प्रस्तुत किया।

मेडल और प्रमाण पत्र से सम्मान

विजेता विद्यार्थियों को मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विनोद कुमार, प्रधानाचार्य अशोक कुमार पुरानिक और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य समरजीत सिंह समेत अन्य अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।