रसायनिक खाद से बीमार हो रही मिट्टी, अब चित्रकूट के 168 गांवों में 'कृषि ज्ञान दूत' किसानों को सिखाएंगे प्राकृतिक खेती
चित्रकूट के कर्वी ब्लॉक के 168 गांवों में 'कृषि ज्ञान दूत' प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देंगे, जिससे रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से खराब हो रही मिट्टी की सेहत सुधरेगी।

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HighLights
कर्वी ब्लॉक के 168 गांवों में प्राकृतिक खेती का संदेश।
'कृषि ज्ञान दूत' किसानों और कृषि विभाग के बीच कड़ी।
गौ आधारित खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी की सेहत प्रभावित होने की चिंता के बीच अब कर्वी ब्लाक के 168 राजस्व गांवों में प्राकृतिक खेती का संदेश पहुंचाया जाएगा। इसके लिए कृषि ज्ञान दूत किसानों और कृषि विभाग के बीच कड़ी का काम करेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां की ओर से जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) से पोषित कृषि ज्ञान दूत योजना के तहत गुरुवार को रामायण मेला परिसर सीतापुर में एक दिवसीय वृहद कार्यशाला आयोजित की गई।
मुख्य विकास अधिकारी डीपी पाल ने कहा कि कृषि ज्ञान दूत अपने-अपने गांवों में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करें। रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की सेहत खराब हो रही है।
अनुदान के बारे में भी दी जानकारी
गौ आधारित प्राकृतिक खेती से मिट्टी को बचाने के साथ बुंदेलखंड में खेती को फिर से लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है। उन्होंने शासन की सहभागिता योजना के तहत देशी गाय पालन पर मिलने वाले अनुदान की भी जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रमुख डा. राजेंद्र सिंह नेगी ने किसानों को रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी। उन्होंने गेहूं की बुवाई 10 से 25 नवंबर के बीच करने, बीज उपचार और उन्नत प्रजातियों के चयन की सलाह दी। सरसों और चना की बुवाई के साथ मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक प्रयोग करने पर बल दिया।
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उप निदेशक कृषि जेएल गुप्ता ने पीएम किसान, फसल बीमा, बीज ग्राम, कृषि यंत्रों पर अनुदान और सोलर पंप समेत विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक रतन कुमार ने किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन ऋण और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। परियोजना प्रभारी उत्तम कुमार त्रिपाठी ने खेत की समस्याओं का फोटो-वीडियो वाट्सएप समूह में साझा कर कृषि वैज्ञानिकों से समाधान लेने की जानकारी दी।
