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चित्रकूट में मकान के लिए बड़े भाई को अगवा कर मार डाला, गला घोंटा...झांसी में डैम में फेंका शव

Published: Tue, 25 Aug 2026 09:52 AM (IST)

मनोज पाल को उसके छोटे भाई अनिल पाल ने संपत्ति विवाद में अगवा कर मार डाला। अनिल ने अपने बेटे ...और पढ़ें

मकान के लिए बड़े भाई को गला घोंटकर मार डाला।

मकान के लिए बड़े भाई को गला घोंटकर मार डाला।

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जागरण संवाददाता, चित्रकूट। पांच दिन पहले अगवा किए गए भरतकूप के बैहार गांव निवासी मनोज पाल की हत्या कर दी गई है। उसके सगे छोटे भाई महोबा निवासी अनिल पाल ने अपने पुत्र, पत्नी और तीन अन्य के साथ मिलकर उसका गला घोंट दिया और हाथ-पैर बांधकर शव को जनपद झांसी के मऊरानीपुर स्थित पहाड़ी डैम में फेंक दिया।

पुलिस ने हत्यारे पिता-पुत्र सहित चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी तक शव नहीं मिला है। हत्या की वजह दोनों भाइयों के बीच साझे के एक मकान को लेकर विवाद है। पुलिस गोताखोरों की मदद से मनोज के शव की तलाश कर रही है।

पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने प्रेसवार्ता कर अपहरण की राजफाश किया तो संपत्ति के लिए रिश्ते को कलंकित करने वाली कहानी सामने आई।

बड़े भाई को किया था अगवा

48 वर्षीय मनोज पाल का 19 अगस्त की शाम करीब पौने आठ बजे शिवरामपुर स्थित चौहान ढाबा के पास से अपहरण हुआ था। ई-रिक्शा से खींचकर कार सवार उसे ले गए थे। जिसकी रिपोर्ट बैहार भरतकूप निवासी पत्नी पट्टी देवी ने 20 अगस्त को दर्ज कराई थी।

एसओजी, भरतकूप और सर्विलांस की टीम ने खोजबीन शुरू की। कई जगह के सीसीटीवी फुटेज और बिल्लू नामक युवक की अपहरण की वारदात को देखा गया।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से कार नंबर और कुछ लोगों के चेहरे नजर आए। इसे अपहृत की पत्नी और बच्चों को दिखाया गया तो शक की सुई मनोज के बड़े भाई महोबा गांधी नगर निवासी फर्नीचर का काम करने वाले अनिल पाल और उसके पुत्र हिमांशू पर ठहरी। कार का नंबर भी महोबा जिले का मिला।

भाई ने भतीजे के साथ मिलकर की हत्या

पुलिस ने 45 वर्षीय अनिल पाल, उसके पुत्र 26 वर्षीय हिमांशू पाल और उसके यहां काम करने वाले थाना खन्ना के सिरसीकला निवासी 30 वर्षीय राजू पाल और 21 वर्षीय रोहित साहू को पकड़ा। कड़ाई से पूछताछ में चारों ने जुर्म कुबूल किया।

अनिल ने बताया कि वे जनपद बांदा थाना जसपुरा गौरीकला गांव निवासी थे। 2005 में उनके बाबा देवीचरन ने हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर में तीन मकान खरीदकर मनोज और अनिल को दिए।

कुछ साल तक वहां रहने के बाद 2006 में दोनों अपने हिस्से के मकान को बेच दिया। अनिल महोबा में रहने लगा और मनोज बैहार भरतकूप में रहने लगा। एक मकान जो बचा था, वह दोनों के नाम था, लेकिन उस पर अनिल और उसका परिवार पूरा कब्जा चाहता था।

मकान के लिए भाई को मार डाला

इसके लिए उन्होंने मनोज को मारने की योजना बनाई थी। 19 अगस्त को उसके ई-रिक्शा का पीछा कर शिवरामपुर के पास जबरन कार में बैठाकर अपहरण किया। महोबा ले गए। वहां पर रात भर घर में रखा और मकान नाम लिखने को कहा, लेकिन भाई तैयार नहीं हुआ। जबकि उन्होंने पीटा भी।

इसके बाद पहाड़ी बांध के पास ले जाकर उससे मकान उसके नाम करने का दबाव बनाया। बार-बार इन्कार करने पर 20 अगस्त की रात को उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और शव बांध में फेंक दिया।

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