जागरण संवाददाता, चकिया (चंदौली) : तमाम प्रयासों के बाद भी गांव में स्वच्छता अभियान

परवान नहीं चढ़ पा रहा है। सफाई कर्मियों की वैसे तो भारी भरकम फौज है।

बावजूद इसके सड़कों, गलियों में कूड़े- करकट का ढेर और जाम पड़ी नालियां परेशानी का कारण बन रही हैं। कूड़े के ढेर से निकल रही दुर्गंध से लोगों को रहना मुश्किल हो गया है। सड़क पर बह रहा चोक नालियों का गंदा पानी आवागमन में बाधक बन

रहा है।

विकास क्षेत्र के 89 ग्राम

पंचायतों में 233 सफाई कर्मियों की नियुक्ति है। बहुतेरे गांवों सफाईकर्मी जाते ही नहीं हैं, इससे वहां की सफाई कागजों में हो रही है। दरअसल, गांव की कोई गली अथवा नाली ऐसी नहीं,

जो कूड़े-करकट से पटी न हो। आलम यह कि एक-दो गांव को छोड़ दिया जाए

तो अधिकांश गांवों में गंदगी का अंबार लगा है। इससे लोगबाग के सेहत पर

प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। गंदगी से लोग संक्रामक बीमारियों की जद में आ रहे हैं। गौरी, कुदरा, लालपुर, छांगुरपुर, बोदारा, डूही-सूही, पचवनियां,

हरिपुर आदि गांवों में सफाई व्यवस्था बेपटरी है।शिकायत पर बीडीओ

सरिता सिंह ने दर्जनोँ गांव का दौरा किया। चहुंओर गंदगी मिलने पर रोस्टर लगाकर सफाई कराने का निर्देश दिया। बावजूद

इसके साफ सफाई नही हो पाई । जाम पड़ी नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहने

से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कूड़ा-करकट को लेकर

ग्रामीण भी सजग नहीं हैं, क्योंकि घर से निकलने वाला कचरा जहां-तहां फेंक

दिया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, नियुक्त सफाईकर्मी लापरवाह बने हुए

हैं। यदा-कदा ही गांव में आकर हाथ-पांव हिला चलते बनते हैं। शिकायत

जिम्मेदार अधिकारियों से की जा चुकी है। इसके बाद भी इनके रवैया में सुधार

नहीं हुआ है।

वर्जन सफाई कर्मियों को कार्य दिवस

में सफाई करने को निर्देशित किया गया है। उनके द्वारा लापरवाही बरती जा

रही है तो लिखित अथवा मौखिक शिकायत मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

सत्येंद्र श्रीवास्तव, एडीओ पंचायत

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