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64 साल पुराने जीटीआर ब्रिज पर सुरक्षा भगवान भरोसे, दो करोड़ की मरम्मत के बाद भी जानलेवा गड्ढे

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 31 Oct 2026 05:26 PM (IST)

पीडीडीयू नगर के 64 साल पुराने जीटीआर ब्रिज पर सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है, जहां मरम्मत के बावजूद जानलेवा गड्ढे ...और पढ़ें

पीडीडीयू नगर जीटीआर ब्रिज पर सुरक्षा में सेंध, डिप्टी एसएस गड्ढे में गिरे।

पीडीडीयू नगर जीटीआर ब्रिज पर सुरक्षा में सेंध, डिप्टी एसएस गड्ढे में गिरे।

HighLights

  1. 64 साल पुराने जीटीआर ब्रिज पर सुरक्षा भगवान भरोसे।

  2. डिप्टी एसएस गड्ढे में गिरे, गंभीर रूप से घायल हुए।

  3. मरम्मत के बावजूद पुल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी।

जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। जीटीआर ब्रिज की उम्र 64 वर्ष हो चुकी है, लेकिन इस पर आवागमन करने वालों की सुरक्षा अब भी भगवान भरोसे है। वर्ष 1962 में निर्मित पुल की वर्ष 2011 में करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर हैवी रिपेयरिंग कराई गई थी। प्रत्येक पांच वर्ष पर पेंटिंग और मेटलाइजिंग का प्रावधान है।

इस वर्ष भी काम चल रहा है। इसके बावजूद क्षतिग्रस्त पटिया और गड्ढे ने डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट संतोष कुमार पांडेय की जान जोखिम में डाल दी। हादसे के बाद पुल के रखरखाव और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुवार देर शाम ड्यूटी पर जा रहे डिप्टी एसएस अंधेरे में पुल पर बने गड्ढे को नहीं देख सके।

पटिया हटने से उनका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे रेलवे ट्रैक पर जा गिरे। सिर, छाती और कमर में गंभीर चोट आने पर उन्हें मंडलीय लोको अस्पताल से बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर करना पड़ा। पुल पर पैदल आवागमन करने वालों की सुरक्षा में बरती जा रही लापरवाही का यह गंभीर उदाहरण है।

मरम्मत पर खर्च, फिर भी सुरक्षा में सेंध

पुल के दोनों तरफ न पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं, न क्षतिग्रस्त हिस्सों की घेराबंदी और चेतावनी संकेत। रात में रोशनी की व्यवस्था भी नाकाफी है। हाल ही में मेले के दौरान लाखों लोगों ने इसी पुल से आवागमन किया। संयोग रहा कि उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। सवाल है कि नियमित रखरखाव के बावजूद पटिया की स्थिति की जांच क्यों नहीं हुई।

जिम्मेदारी से बच रहे विभाग

ब्रिज के एक्सईएन के अनुसार पुल के लोहे के गटर की देखभाल उनके विभाग की जिम्मेदारी है, जबकि पटिया की मरम्मत डीएन हेडक्वार्टर कराता है। पटिया टूटने या हटने से हादसा हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी उनके विभाग की नहीं है। अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि पटिया टूटकर कोई व्यक्ति नीचे गिरता तो सीधे ओएचई लाइन पर पहुंचने से बड़ा हादसा हो सकता था।

 

घटना की जांच कराई जा रही है। अभी स्पष्ट नहीं है कि डिप्टी एसएस पुल के किस स्थान से नीचे गिरे। घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मामले की कड़ाई से जांच होगी।

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विश्वनाथ, मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी, पीडीडीयू रेल मंडल

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