विंध्य एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत, चंदौली को मिले 1200 करोड़ रुपये
विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए भूमि खरीद हेतु 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें चंदौली को सर्वाधिक 1200 करोड़ ...और पढ़ें

विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए 2800 करोड़ स्वीकृत, चंदौली को मिले 1200 करोड़ रुपये।
HighLights
विंध्य एक्सप्रेसवे भूमि खरीद को 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत।
चंदौली को सर्वाधिक 1200 करोड़ रुपये का आवंटन।
भूमि अधिग्रहण और किसान मुआवजा प्रक्रिया में तेजी आएगी।
महेंद्र दुबे, जागरण, चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में शासन ने बड़ा कदम उठाया है। सोनभद्र से चंदौली, मीरजापुर होते हुए गाजीपुर तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे-पूर्वांचल लिंक स्पर परियोजना के लिए भूमि खरीद को 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें चंदौली को सर्वाधिक 1200 करोड़ रुपये मिले हैं।
वहीं, गाजीपुर को 1100 करोड़ और मीरजापुर को 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। संयुक्त सचिव निमेष कुमार शुक्ल ने 29 अक्तूबर को शासनादेश जारी किया है। उन्होंने तीनों जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं । अब तीनों जिलों में भूमि क्रय की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
चंदौली, गाजीपुर, मीरजापुर में भूमि अधिग्रहित किया गया है। इसमें अकेले चंदौली में एक्सप्रेसवे के लिए 52 गांवों की भूमि अधिग्रहित की गई है। इससे करीब नौ हजार किसान प्रभावित होंगे। भूमि खरीद के लिए 1200 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने से किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
अब तक भूमि अधिग्रहण और बजट की उपलब्धता परियोजना के अहम चरणों में शामिल रहे हैं। शासन से धनराशि स्वीकृत होने के बाद प्रशासन के सामने भूमि क्रय की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की चुनौती होगी।
विंध्य एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल के जिलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। इसके निर्माण से सोनभद्र, चंदौली, मीरजापुर और गाजीपुर के बीच आवागमन सुगम होगा।
साथ ही औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और कृषि उत्पादों के परिवहन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। खासकर चंदौली में एक्सप्रेसवे बनने से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क का लाभ मिल सकेगा।
डीएम की मांग पर जारी हुआ शासनादेश
तीनों जिलों के जिलाधिकारियों की ओर से भूमि खरीद के लिए शासन से धनराशि की मांग की गई थी। इसके बाद शासन ने बजट की स्वीकृति देते हुए शासनादेश जारी किया है। स्वीकृत धनराशि संबंधित जिलों के डिपॉजिट खातों में भेजी जाएगी। इसके बाद भूमि क्रय और किसानों को मुआवजा देने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।