पीडीडीयू मंडल में ट्रेनों की रफ्तार न थमे, इसलिए मजबूत हो रही बिजली व्यवस्था
पीडीडीयू मंडल में ट्रेनों के सुचारु परिचालन के लिए बिजली व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। अप्रैल से सितंबर ...और पढ़ें

पीडीडीयू मंडल में ट्रेनों की रफ्तार बनाए रखने के लिए बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत।
HighLights
पुराने एल्युमिनियम कैटेनरी तारों को कॉपर कॉन्टैक्ट वायर से बदला।
पीडीडीयू मंडल में 18 किलोमीटर साइडिंग लाइनों का विद्युतीकरण हुआ।
पेड़ों की छंटाई से बिजली आपूर्ति में संभावित व्यवधान कम किया।
जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए समय पर गंतव्य तक पहुंचना सबसे अहम है। इसके पीछे पटरियों के साथ बिजली की निर्बाध व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पीडीडीयू मंडल में बढ़ते ट्रेन परिचालन के बीच इसी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
अप्रैल से सितंबर तक ट्रैक्शन पावर और ओवरहेड विद्युत व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, ताकि बिजली से जुड़ी खामियों के कारण ट्रेनों के परिचालन पर असर न पड़े। मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना के निर्देश पर कर्षण वितरण विभाग ने बारुण-डाल्टनगंज खंड में 38.05 किलोमीटर एल्युमिनियम कैटेनरी वायर को कॉपर कॉन्टैक्ट वायर से बदला।
इसके साथ ही मंडल में 18.77 किलोमीटर पुराने हो चुके कॉन्टैक्ट वायर का भी प्रतिस्थापन किया गया। कॉन्टैक्ट वायर ही वह माध्यम है, जिससे इलेक्ट्रिक इंजन का पैंटोग्राफ संपर्क कर उसे बिजली मिलती है। ऐसे में इसकी मजबूती सीधे तौर पर ट्रेन परिचालन की विश्वसनीयता से जुड़ी है।
पेड़ों की शाखाओं से भी नहीं आएगा व्यवधान
मानसून के दौरान पेड़ों की शाखाओं से ओवरहेड तारों को होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए 2449 पेड़ों और 38,057 शाखाओं की छंटाई कराई गई। इसका उद्देश्य विद्युत आपूर्ति में व्यवधान की आशंका को कम करना है। यात्रियों के साथ माल परिवहन के लिहाज से भी मंडल की साइडिंग व्यवस्था अहम है।
18 किलोमीटर साइडिंग लाइन का विद्युतीकरण पूरा किया गया। इसमें पीडीडीयू डाउन मार्शलिंग यार्ड, डाउन डिपार्चर यार्ड, भभुआ रोड डाउन साइडिंग, पहलेजा, पुसौली और दुर्गावती अप साइडिंग का दिल्ली छोर शामिल है। इससे साइडिंग में इलेक्ट्रिक इंजन के परिचालन को बढ़ावा मिलेगा और परिचालन प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।
बढ़े परिचालन के साथ बिजली की मांग पर नजर
पीडीडीयू मंडल में यात्री और मालगाड़ियों को मिलाकर प्रतिदिन औसतन 700 से अधिक ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। ऐसे में ट्रैक्शन पावर की मांग भी लगातार बदलती रहती है। विभाग अलग-अलग क्षेत्रों में विद्युत भार की निगरानी कर जरूरत के अनुसार उसका समायोजन कर रहा है। इससे उपलब्ध बिजली क्षमता का बेहतर उपयोग हो रहा है।
खास बात यह है कि अनुबंधित विद्युत मांग सीमा के भीतर ही प्रबंधन किए जाने से चालू वित्तीय वर्ष में अब तक विद्युत वितरण कंपनियों को कोई अधिभार नहीं देना पड़ा है। यानी बढ़ते ट्रेन परिचालन के बीच बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के साथ खर्च पर भी नियंत्रण रखा जा रहा है। इससे यात्रियों के लिए ट्रेन परिचालन को अधिक सुरक्षित, सुचारु व भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी।
