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हादसा

- आयल फैक्ट्री में गैस स्ट्रक्चर टंकी का बोल्ट खोलने के दौरान हुआ हादसा

- ग्रामीणों संग परिजनों ने शव को गेट पर रखकर किया प्रदर्शन

- संचालक ने आश्रितों को दिया 14 लाख मुआवजा, छोटे भाई को नौकरी

-लेबर इनफोर्समेंट अफसर बोले तकनीकी मामलौ, होगी जांच

जागरण संवाददाता, दुर्गावती (चंदौली) : भेरिया रोड पर धान की भूसी (ब्रान) से कच्चा तेल बनाने वाली एक आयल कंपनी में बुधवार की भोर स्ट्रक्चर टैंकर से मिथेन गैस का रिसाव हो गया। इससे कर्मचारी संगम ¨सह (20) की मौत हो गई जबकि गोरखपुर निवासी महेंद्र गुप्ता (45), मलिया बाग निवासी उमेश वर्मा (35) मूर्छित हो गए। कंपनी के कर्मी तीनों को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां संगम को मृत घोषित कर दिया। दो अन्य की स्थिति बिगड़ती देख चिकित्सकों ने उन्हें रेफर कर दिया। रास्ते में दोनों को होश आ गया इससे उन्हें चंदौली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों को भनक लगी तो ग्रामीणों संग कंपनी पहुंच हंगामा करने लगे। मृतक के शव को कंपनी गेट के समक्ष रखकर धरना शुरू कर दिया।

पुलिस की सूचना पर पहुंचे मिल मालिक चंद्रप्रकाश अग्रवाल ने पीड़ित परिवार 14 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी व अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार नगद देकर धरना खत्म कराया। दोपहर बार परिवार के लोगों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

मंगलवार को फैक्ट्री की स्ट्रक्चर टंकी की जाली टूट गई थी। इससे फैक्ट्री की रोलर मशीन नहीं चल रही थी। जाली ठीक करने के लिए भेरिया निवासी संगम टंकी के बगल का नट बोल्ट खोलने लगा। अचानक जहरीली गैस का रिसाव हुआ, जिसमें संगम की जान चली गई। दूसरे कर्मचारी महेंद्र व उमेश उसे बचाने को दौड़े अचेत हो गए। भनक लगी फैक्ट्री में हड़कंप मच गया। कर्मचारी की मौत से आक्रोश भड़का तो मिल के बाहर बवाल होने लगा। मुआवजे एवं नौकरी की डिमांड की जाने लगी। रामगढ़ के विधायक अशोक ¨सह मुखिया पति अंगद ¨सह सहित पब्लिक का नेतृत्व कर रहे थे।

'फैक्ट्री में सुरक्षा के अलग-अलग मानक हैं। यह उसकी स्थिति पर होता है। सामान्य सुरक्षा तो हर किसी को करनी होती है। मिथेन गैस रिसाव तकनीकी मामला है। इसकी जांच की जाएगी, बोर्ड तय करेगा कि क्या कार्रवाई होगी। मिथेन गैस यदि 30 अंश तक छोड़ी जाए तो नुकसान नहीं होता है। इसके ऊपर हुआ तो जान भी जा सकती है।श्रीकांत कुमार, लेबर इनफोर्समेंट अफसर कैमूर।

नहीं है सुरक्षा इंतजाम

फैक्ट्री में न आग बुझाने वाले संयंत्र हैं न ही कर्मियों की सुरक्षा का इंतजाम। फैक्ट्री में एक भी इंजीनियर व इंचार्ज कार्यरत नहीं है। कर्मियों को मास, सेफ्टी बूट, वर्दी, हेलमेट आदि नहीं दिया जाता। कर्मियों को 8 घंटे का 175 रुपये प्रतिदिन का मेहनताना मिलता है। जांच को पहुंचे अधिकारी अमूमन फैक्ट्री मालिक से मिलकर लौट जाते हैं।

शादी से पहले उठी संगम की अर्थी

जासं, दुर्गावती (कैमूर) : संगम के पिता नागेंद्र ¨सह की पूर्व में ही मौत हो चुकी थी। इस सदमे से संगम की मां उबर भी नहीं पाई कि बुधवार की भोर में गैस रिसाव से संगम भी चल बसा। इससे भेरिया गांव सहित परिवार सदमे में डूबा है। परिवार का पूरा खर्च फैक्ट्री में कार्यरत संगम ही चलाता था। उसके चले जाने के बाद मां और छोटे भाई छोटू पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रोती-बिलखती मां और बेटे का बुरा हाल था। अप्रैल माह में संगम की शादी का भी दिन रख गया था। शादी की तिथि नजदीक आने के साथ शादी की तैयारियां तेज हो रही थी। संगम की बारात कोचस में जानी थी।

Posted By: Jagran

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