जागरण संवाददाता, चंदौली : कोरोना वायरस के भय को देखते हुए जहां लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है। वहीं स्वास्थ्यकर्मी, एंबुलेंस कर्मी, पुलिसकर्मी, एलपीजी गैस वेंडर, फल, सब्जी और दूध विक्रेता महामारी की चुनौतियों से जूझते हुए जनता की सेवा में लगे हैं। वायरस से बचाव के लिए इनके पास जरूरी संसाधन भी नहीं है। ऐसे में यदि बीमार पड़े तो लोगों की जिदगी थम जाएगी।

कोरोना का संक्रमण तेजी से पांव पसारता जा रहा है। धान का कटोरा भी इससे अछूता नहीं है। यहां से चार संदिग्ध मरीजों का सैंपल जांच के लिए बीएचयू भेजा जा चुका है। इससे लोग दहशत में हैं। लेकिन कर्मयोगी आशंकाओं से भयभीत हुए बगैर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। जिले में कोरोना से जंग के लिए स्वास्थ्य संसाधनों का टोटा है। जिला अस्पताल के आइसीयू में आइसोलेशन वार्ड तो बना दिया गया। लेकिन अभी तक जरूरी सुविधाएं बहाल नहीं हो सकी हैं। चिकित्सकों के किट, ग्लब्स, एन 95 मास्क, पर्याप्त मात्रा में सैनिटाइजर का टोटा है। वहीं न तो जिला प्रशासन और नहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मयोगियों में इसका वितरण किया जा रहा। इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। कार्ययोजना बनाने में जुटा महकमा

जनप्रतिनिधियों ने कोरोना से जंग को संसाधनों की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन को 95 लाख रुपये दिए हैं। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग से सैनिटाइजर, मास्क, ग्लब्स, किट आदि खरीदने के लिए प्रस्ताव मांगा है ताकि किसी कंपनी से अनुबंध कर वस्तुओं की आपूर्ति कराई जा सके।

Posted By: Jagran

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