पूर्व मध्य रेलवे का मेगा प्रोजेक्ट: पीडीडीयू-बिहार के बीच 400 किमी तक बिछेगी तीसरी-चौथी रेल लाइन
रेलवे पीडीडीयू-झाझा रेलखंड पर लगभग 400 किलोमीटर लंबी तीसरी व चौथी रेल लाइन बिछाकर यात्री व माल यातायात क्षमता बढ़ा रहा है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
पीडीडीयू-झाझा रेलखंड पर 400 किमी नई रेल लाइनें बिछेंगी।
यात्री व मालगाड़ियों के लिए क्षमता बढ़ेगी, यातायात सुगम होगा।
यह परियोजना 'विकसित भारत' के लक्ष्य को मजबूती देगी।
जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। पीडीडीयू-झाझा रेलखंड पर बढ़ते यात्री व माल यातायात के दबाव को देखते हुए रेलवे अब करीब 400 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने में जुट गया है। पीडीडीयू से किऊल तक तीसरी व चौथी और किऊल से झाझा तक तीसरी रेल लाइन बिछाई जाएगी।
यह परियोजना पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता विस्तार के साथ यातायात को अधिक सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक डिम्पी गर्ग इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की लगातार निगरानी कर रही हैं।
परियोजना को पीडीडीयू-दानापुर, दानापुर-फतुहा, फतुहा-बख्तियारपुर, बख्तियारपुर-पुनारख, पुनारख-किऊल व किऊल-झाझा छह रेलखंडों में बांटा गया है। अलग-अलग चरणों में स्वीकृति, निविदा और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
इसका उद्देश्य एक ही मार्ग पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या के बीच परिचालन क्षमता बढ़ाना है। ताकि यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी अधिक ट्रैक उपलब्ध हो सकें।
विकसित भारत की रफ्तार को मिलेगी मजबूती
रेलवे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। नई रेल लाइनें केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों, बाजारों, कृषि उत्पादों और उपभोक्ता केंद्रों को तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ने का आधार भी हैं।
पीडीडीयू-झाझा के बीच अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से माल ढुलाई के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी। इससे कोयला, खनिज, औद्योगिक सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को गति देने में मदद मिलेगी।
यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने से भविष्य में समयबद्ध और सुगम रेल सेवा का आधार तैयार होगा। रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ना विकसित भारत के लक्ष्य से भी सीधे जुड़ा है।
तेज परिवहन व्यवस्था से उद्योगों को बाजार तक पहुंचने, माल की आवाजाही में समय कम करने तथा प्रमुख शहरों व आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क मजबूत करने में मदद मिलती है। इस लिहाज से यह परियोजना केवल रेल लाइन बिछाने तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाली आधारभूत संरचना के रूप में देखी जा रही है।
ईपीसी से एक एजेंसी संभालेगी पूरा काम
परियोजना के विभिन्न हिस्सों में ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) पद्धति अपनाई जा रही है। इसमें संबंधित एजेंसी को परियोजना की इंजीनियरिंग, आवश्यक सामग्री व संसाधनों की खरीद तथा निर्माण कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाती है। इससे परियोजना के अलग-अलग चरणों में समन्वय बेहतर करने और निर्माण को एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाने की व्यवस्था बनती है।ॉ
कई खंडों में टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी
बिहार के पटना जिले के पुनारख-बाढ़-बख्तियारपुर के 28.22 किलोमीटर रेलखंड का टेंडर आठ अप्रैल को अवार्ड किया जा चुका है। इसे जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बख्तियारपुर-फतुहा के 24.16 किलोमीटर रेलखंड के लिए 15 अक्टूबर तक टेंडर आमंत्रित करने का लक्ष्य है। इसे अक्टूबर 2030 तक पूरा करने की समयसीमा निर्धारित है।
पुनारख से किऊल के बीच 50 किलोमीटर रेलखंड में महत्वपूर्ण व बड़े पुलों के लिए ईपीसी टेंडर तीन जून को आमंत्रित किया जा चुका है। इसे मार्च 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य है। किऊल-झाझा के बीच तीसरी लाइन के महत्वपूर्ण व बड़े पुलों के लिए भी ईपीसी टेंडर आमंत्रित किया जा चुका है।
फतुहा-दानापुर के करीब 30 किलोमीटर रेलखंड को 31 जुलाई को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं दानापुर-डीडीयू के बीच तीसरी व चौथी लाइन के लिए टेंडर क्लीयर हो चुका है।
पीडीडीयू-झाझा रेलखंड पर लगातार बढ़ते रेल यातायात को देखते हुए आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है। करीब 400 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट को अलग-अलग रेलखंडों में बांटकर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पीडीडीयू से किऊल तक तीसरी-चौथी तथा किऊल से झाझा तक तीसरी लाइन बनने से रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी। परियोजना की प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ काम पूरा करना प्राथमिकता है। -डिम्पी गर्ग, महाप्रबंधक, पूर्व मध्य रेलवे।
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