यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
खोदाई के दौरान गर्भ गृह समेत कुषाण काल की मिली ईंट
माटीगांव स्थित शिव मंदिर परिसर में काशी हिदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा शुक्रवार को भी उत्खनन कार्य जारी रहा। इ

ताराजीवनपुर (चंदौली): माटीगांव स्थित शिव मंदिर परिसर में काशी हिदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा शुक्रवार को भी उत्खनन कार्य जारी रहा। इस दौरान एक अन्य बड़ा वृत्त आकार का गोलाकार गर्भगृह वाला संरचना पूर्व प्राप्त पंचायतन प्रकार का मंदिर उत्तरी दिशा में मिला। साथ ही एक प्राप्त गर्भगृह के दक्षिणी दीवार की ओर पश्चिमोन्मुख स्थिति में प्राप्त हुआ है। संभावना है कि किसी कारण वश मंदिर के विनष्ट होने के परिणामस्वरूप और अरघा अपने यथास्थिति से अन्यत्र पड़ा मिला है। प्राप्त हुए अरघे का संपूर्ण व्यास45 सेंटीमीटर तथा आंतरिक व्यास 36 सेंटीमीटर है। अरघे के बीचोबीच एक अंडाकार छिद्र शिवलिग को प्रतिष्ठापित करने के लिए बना है जिसकी गहराई अधिकतम दस सेंटीमीटर है। गोलाकार मंदिर के गर्भगृह का फर्श लगभग 25 सेंटीमीटर ऊंचा है। ईंट से निर्मित संरचना सूर्खी चूना व प्लास्टर से विनिर्मित है। प्राप्त संरचना ट्रेंज के उत्तरी भाग में प्राप्त हुआ है। इस प्रकार प्राप्त मंदिर क्रमश: उत्तर दक्षिण की ओर बढ़ती हुई मंदिर समूह को दर्शाता है। आज जो संरचना प्राप्त हुई है वह पूर्व में प्राप्त सभी संरचनाओं से काफी बड़ा है। उत्खनन के निदेशक डॉ विनय कुमार का कहना है कि आज जो संरचना प्राप्त हुई है वह गुप्तकालीन वृत्ताकार मंदिर है जिसमें प्रयुक्त ईंट संभवत: कुषाणकालीन है। जिसकी तिथि आज से लगभग 2200 साल वर्ष पूर्व है। उत्खनन का संचालन पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ओंकार नाथ सिंह के देखरेख में चल रहा है। उत्खनन टीम में विभाग के डॉ अभिषेक सिंह,परमदीप पटेल तथा राघव साहनी शामिल रहे।