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इस दीपावली अपनाएं प्रकृति का साथ! ग्रीन गिफ्ट्स और गुलाबी मीनाकारी की बढ़ी मांग

Published: Fri, 06 Nov 2026 01:30 PM (IST)

दीपावली पर अपनों को पर्यावरण अनुकूल उपहार देने की पहल की जा रही है, जिसमें पौधे, मिट्टी के दीये और ...और पढ़ें

ये तस्वीर आई द्वारा जनरेट की गई है।

ये तस्वीर आई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. पौधे, मिट्टी के दीये जैसे पर्यावरण अनुकूल उपहार अपनाएं।

  2. स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा दें।

  3. प्लास्टिक पैकिंग से बचें, जूट-सूती थैलों का उपयोग करें।

जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। दीपावली पर अपनों को उपहार देने की परंपरा को इस बार पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की पहल की जा रही है। महंगे और दिखावटी सामान के बजाय पौधे, मिट्टी के दीये, स्थानीय हस्तशिल्प और प्राकृतिक उत्पाद बेहतर विकल्प बन सकते हैं।

पीडीडीयू नगर से लेकर चंदौली जनपद तक ग्रीन गिफ्ट के कई विकल्प उपलब्ध हैं। मिट्टी के दीये, लकड़ी के खिलौने, हस्तनिर्मित सजावटी सामान और गुलाबी मीनाकारी जैसे पारंपरिक उत्पाद उपहार में दिए जा सकते हैं। मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और बोगनवेलिया जैसे पौधे उपहार में दिए जा सकते हैं।

सीड बाल्स भी उपयोगी विकल्प हैं। पैराफिन मोम के बजाय सोया वैक्स या प्राकृतिक मोम से बनी मोमबत्तियां अपनाई जा सकती हैं। गोबर और मिट्टी के दीये भी त्योहार की पारंपरिक सुंदरता बढ़ाएंगे।

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दीपावली पर उपहार ऐसा होना चाहिए, जो केवल खुशियां न बांटे, बल्कि प्रकृति की रक्षा का संदेश भी दे। पौधे और स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पाद उपहार में देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल की जा सकती है।
चित्रा सिंह, अध्यक्ष, डीडीयू महिला कल्याण संगठन

मिट्टी के दीये, प्राकृतिक मोम की मोमबत्तियां और पर्यावरण अनुकूल सजावटी सामान हमारी परंपरा को सहेजने के साथ प्रदूषण कम करने में सहायक हैं। त्योहार पर प्राकृतिक उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आकांक्षा चौधरी, उपाध्यक्ष प्रथम, डीडीयू महिला कल्याण संगठन

उपहारों की पैकिंग में प्लास्टिक से बचना जरूरी है। इसके स्थान पर जूट और सूती थैलों का इस्तेमाल करें। पर्यावरण संरक्षण के लिए की गई छोटी-छोटी पहल भी बड़े बदलाव का आधार बन सकती है।
दीपिका, उपाध्यक्ष द्वितीय, डीडीयू महिला कल्याण संगठन

स्थानीय कारीगरों, कुम्हारों और छोटे कारोबारियों के उत्पाद खरीदने से उन्हें रोजगार मिलेगा। इससे स्वदेशी हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी।
शालिनी भूषण, सचिव, डीडीयू महिला कल्याण संगठन

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