जासं, पीडीडीयू नगर (चंदौली) : कोरोना संक्रमण को लेकर पूरी दुनिया सतर्क है। बहुतायत देश इस बीमारी से मुक्ति के लिए एक दूसरे से तकनीकी व चिकित्सकीय सुविधाओं को साझा करने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। इसी क्रम में कुवैत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी। खासकर आपदा प्रबंधकीय व्यवस्था को लेकर। पीएम की पहल पर सारथी बने चंदौली के आर्मी मेडिकल कोर के ब्रिगेडियर दीपक श्रीवास्तव। उन्होंने कुवैत को चिकित्सकीय सुविधा और वहां के चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ को दक्ष करने की रणनीति को आकार देने की कमान संभाली। 15 सदस्यीय दल की अगुवाई करते हुए एक अप्रैल को कुवैत पहुंचकर ब्रिगेडियर ने महामारी जैसी आपात स्थिति से निबटने, चिकित्सकीय प्रबंधन, इलाज, जांच व परीक्षण आदि की बेहतर जानकारी दी। साथ ही कुवैत के चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ को भी दक्ष करने के के बाद 15 अप्रैल को टीम देश लौट आई।

पूरी टीम क्वारंटाइन

कुवैत के चिकित्सकों को आपदा प्रबंधन के गुर की सीख देने के बाद ब्रिगेडियर समेत पूरी टीम 14 दिन क्वारंटाइन में रही। टीम पुन: एक मई से अपने दायित्व निर्वहन में जुट गई। शांति मिशन प्रक्रिया तहत सेवा

भारतीय सेना का मेडिकल कोर यूएन शांति मिशन प्रक्रिया के तहत कई देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है। आपदा के अलावा भी अन्य देशों में अनवरत चिकित्सकीय सेवा दी जाती है। चंदौली के सुभाष नगर निवासी ब्रिगेडियर श्रीवास्तव कई चिकित्सकीय दल का नेतृत्व कर चुके हैं। उन्हें बेस्ट शॉट और मिलिट्री मैनेजमेंट कोर्स में ट्रॉफी समेत कई पदकों से सम्मानित किया गया है। वर्तमान में ब्रिगेडियर एनेस्थेसिया व क्रिटिकल केयर विभाग प्रमुख मिलिट्री बेस अस्पताल, नई दिल्ली में तैनात हैं। 15 दिन का कुवैत दौरा का अनुभव काफी अच्छा रहा। दिल से कार्य को मूर्तरूप दिया। साथ में बेहतरीन टीम रही, जिसका पल-पल साथ मिला। भविष्य में दोबारा सेवा का मौका मिलेगा तो जरूर जाएंगे।

-दीपक कुमार श्रीवास्तव, आर्मी मेडिकल कोर के ब्रिगेडियर।

Posted By: Jagran

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