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308 पहियों वाला महाबली ट्रक वोल्वो कंपनी का सबसे हेवी मॉडल, इंजन की ताकत इतनी चलने पर थर्रा जाती है जमीन

Published: Tue, 29 Sep 2026 09:36 AM (IST)

एक 308 पहियों वाला 'महाबली' ट्रक बेल्जियम से आए 200 टन के विशाल वेसल को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 308 पहियों का ट्रक... बस इतनी सी बात पर एक माल वाहक वाहन जिसे महाबली ट्रक का नाम दिया जा रहा है, कौतूहल का विषय बना हुआ है। यह ट्रक जिधर से गुजर रहा है, वहीं देखने वालों की भीड़ लग जा रही है। भीड़ आखिर लगे क्यों ना? 308 पहिए और 200 टन का वजन लेकर यह ट्रक जब अपनी मंजिल की ओर बढ़ता है तो आसपास की धरती में कंपन पैदा हो जाती है।

यह तो सभी ने जान लिया होगा कि इस महाबली ट्रक पर 200 टन का वजन लदा हुआ है जो बेल्जियम से आया एक वेसल बताया जा रहा है, जिसका उपयोग बलरामपुर चीनी मिल के कुंभी प्लांट में होगा। इस वायरल ट्रक का आकार-प्रकार ही लोगों को हतप्रभ कर रहा है।

मल्टी एक्सल ट्रक की इंजन पावर कितनी है?

बेल्जियम से उड़ीसा के पारादीप बंदरगाह पहुंचे 200 टन के वेसल को लखीमपुर खीरी जिले में स्थित बलरामपुर चीनी मिल के कुंभी प्लांट में पहुंचाने का ठेका जेएम बक्शी ग्रुप की कंपनी ने लिया है। यह कंपनी वेसल को सड़क मार्ग के जरिए उड़ीसा से उत्तर प्रदेश ला रही है।

तकरीबन 100 फीट लंबा और 7 मीटर चौड़ा वेसल मात्र एक यूनिट का है, इसे अलग-अलग कर या हिस्सों में बांट कर प्लांट तक नहीं पहुंचा सकते, बस इसी चुनौती को पूरा करने के लिए ट्रांसपोर्ट कंपनी ने एक बहुत ही ताकतवर इंजन वाले ट्रक को इस काम में लगाया है।  यह ट्रक वोल्वो कंपनी का एफएच 16 मॉडल है।

3800 न्यूटन मीटर की ताकत

वोल्वो कंपनी ने इस ट्रक को 100 टन से अधिक भार ढोने की क्षमता के अनुरूप ही डिजाइन किया है। अगर आपको इंजन के बेसिक इंजीनियरिंग के बारे में जानकारी है तो आप इसकी ताकत का अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं कि इसके इंजन में तीन वैरायटी आती है जो की 600, 700 और 780 एचपी का है। यह ट्रक तकरीबन 3800 न्यूटन मीटर का टॉर्क पैदा करता है, जिससे सैकड़ों टन माल लदा होने के बाद भी ट्रक को आगे बढ़ाने में आसानी होती है।

क्यों लग रहा इतना समय?

बेशक ट्रक में इतनी ताकत है कि यह 200 टन के वजन को आसानी से खींच सकता है, लेकिन भारत की सड़कों पर इतने बड़े और वजनी वेसल को ढोने के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से ही इस ट्रक को तकरीबन 20 किलोमीटर आगे बढ़ाने में ही एक से दो दिन का समय लग जाता है, क्योंकि भारत की सड़क डिवाइडरों, खंबे से गिरी हैं, कहीं पर पुल आड़े आ रहा है तो कहीं पर बिजली के खंभे और कहीं कहीं पर सड़क की चौड़ाई ही कम है।

ऐसे में ट्रक को आगे बढ़ाने के लिए पहले आगे का रास्ता बनाया जाता है। इस काम के लिए कंपनी ने तकरीबन 65 लोगों की एक टीम बनाई है, जिसमें मजदूर ड्राइवर और इंजीनियर तक शामिल हैं, जो ट्रक के सामने आने वाली परिस्थितियों का जायजा करते हैं और उसके आगे बढ़ने का रास्ता बनाते हैं।

स्वीडन देश की है वोल्वो कम्पनी

बता दें कि वह ट्रक बनाने वाली कंपनी वोल्वो स्वीडन देश की कम्पनी है। यह कंपनी हेवी ड्यूटी गाड़ियां जैसे लग्जरी बस, ट्रक और बड़े मॉडल में आने वाली कार आदि की मैन्युफैक्चरिंग करती है। इस कंपनी की स्थापना 1927 को हुई थी।

फिलहाल यह ट्रक बनारस तक पहुंच चुका है, जिसमें अब तक 2 करोड़ का डीजल की खपत हो चुकी है। ट्रक के ड्राइवर ने बताया कि रोजाना 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है। संभावना है कि आने वाले नवरात्र तक यह ट्रक लखीमपुर प्लांट तक पहुंच जाएगा। इससे पहले की इस ट्रक से जुड़ी सभी जानकारी को आप तक पहुंचाया जाएगा, बने रहिए दैनिक जागरण के साथ।

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