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हार्ट अटैक के समय जान बचाने में गोल्डन ऑवर का बड़ा महत्व, मुफ्त इलाज देने वाला 'स्टेमी केयर प्रोग्राम' बना संजीवनी

By Jagmohan Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 27 Aug 2026 01:32 PM (IST)

बुलंदशहर में स्टेमी केयर प्रोग्राम ने चार माह में 34 हार्ट अटैक मरीजों की जान बचाई है। इस योजना के ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो

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HighLights

  1. बुलंदशहर के आठ सरकारी अस्पतालों पर हार्ट के मरीजों को मिल रहा उपचार।

  2. चार माह में 1820 मरीजों की हुई ईसीजी और 34 को लगा टेनेक्टेप्लस इंजेक्शन

जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। दिल के गंभीर दौरों से जान बचाने के लिए सरकारी अस्पतालों और सीएचसी पर शुरू किया गया स्टेमी केयर प्रोग्राम असर दिखाने लगा है। चार माह में हार्ट अटैक के 1820 मरीजों की ईसीजी की गई और 34 मरीजों को टेनेक्टेप्लस इंजेक्शन देकर जान बचाई गई। छह मरीजों को गंभीर हालत के चलते रेफर किया गया।

प्रदेश सरकार ने दिल के दौरे से मरीजों की जान बचाने के लिए STEMI (ST-Elevation Myocardial Infarction)) केयर प्रोग्राम शुरू किया। इसमें हार्ट अटैक के मरीज को गोल्डन ऑवर (परेशानी के पहले घंटे) में उपचार दिए जाने की योजना है। इस योजना के तहत सरकारी अस्पताल में हार्ट अटैक के मरीजों को 40 से 50 हजार रुपये तक की कीमत वाले महंगे थ्रोम्बोलिसिस इंजेक्शन (जैसे टेनेक्टेप्लस) बिल्कुल मुफ्त दिए जाते हैं।

सीएचसी और जिला अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट की व्यवस्था नहीं है। इसलिए ईसीजी रिपोर्ट वाट्सएप ग्रुप के जरिए मेडिकल कालेजों या हब के विशेषज्ञों को भेजी जाती है। विशेषज्ञों की सलाह लेकर मरीज को गोल्डन ऑवर के भीतर सही इलाज देकर जान बचाई जाती है।

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स्टेमी योजना के नोडल अधिकारी डा. रमित कुमार सिंह का कहना है कि कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला अस्पताल, एसएसएमजे खुर्जा, 100 बेड डिबाई, संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, सीएचसी अनूपशहर, सीएचसी लखावटी, सीएचसी शिकारपुर और सीएचसी स्याना पर स्टेमी के तहत दिल के मरीज को उपचार की सुविधा शुरू की गई है।

योजना के लिए चिंहित सभी अस्पतालों पर टेनेक्टेप्लस इंजेक्शन उपलब्ध है। ईसीजी मशीन और मानिटर भी उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में 650 मरीजों की ईसीजी की गई। स्टेमी के लिए 36 मरीज चिंहित किए गए और 30 को टेनेक्टेप्लस इंजेक्शन दिया गया।

लखावटी सीएचसी पर एक और शिकारपुर सीएचसी पर तीन मरीज को इंजेक्शन लगाया गया। स्वास्थ्य केंद्र पर सीने में दर्द या अन्य लक्षणों के साथ आने वाले मरीज का तुरंत ईसीजी किया जाता है।