गंगा के क्रोध की भेंट चढ़ा सिद्ध गंगा घाट! सीसी मार्ग हो या मंदिर-धर्मशाला... गंगा के उफान में सब तबाह
बुलंदशहर के अहार स्थित सिद्ध गंगा घाट गंगा के भीषण कटान के कारण वीरान हो गया है, जहां एक साल ...और पढ़ें

गंगा के कटान से वीरान हुआ ऐतिहासिक सिद्ध गंगा घाट। जागरण
HighLights
बुलंदशहर के अहार का सिद्ध गंगा घाट पर भीषण कटान जारी।
एक साल में 250 मीटर मार्ग, मंदिर, धर्मशाला गंगा में विलीन।
अधिकारियों की अनदेखी से ऐतिहासिक स्थल का अस्तित्व खतरे में।
संवाद सूत्र, अहार (बुलंदशहर)। सूबे के कई प्रांतों के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहने वाला सिद्ध गंगा घाट अब गंगा के कटान से वीरान हो चुका है। जहां कभी पूजा-पाठ, यज्ञ और श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती थी, वहां अब कटान की खामोशी और गंगा की तेज लहरें उफ़ान लेती दिखाई देती हैं।
एक वर्ष में करीब 250 मीटर सीसी मार्ग, मंदिर, धर्मशाला, करीब 50 नल, यज्ञ स्थल और कई विशालकाय वृक्ष गंगा में समा चुके हैं। ऐतिहासिक धार्मिक स्थल सिद्ध गंगा घाट का स्वरूप तेजी से मिटता जा रहा है, लेकिन कटान रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
गंगा का जलस्तर कम होने के बावजूद गंगा की उफनती लहरें लगातार घाट के किनारे की जमीन काट रही है। मेला स्थल, चबूतरे और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कई स्थान भी गंगा की भेंट चढ़ चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी आते हैं, निरीक्षण करते हैं और निर्देश देकर चले जाते हैं, लेकिन जमीन पर बचाव कार्य के नाम पर कोई कार्य नहीं किया गया।
लगभग एक माह पहले किसान यूनियन भानु के कार्यकताओं में भी कटान के विरोध में जल संग्रह आंदोलन के माध्यम से प्रशासन को चेताया गया था कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो धार्मिक स्थल और आसपास की जमीन का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके बावजूद कटान पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी। घाट पर श्रद्धालुओं को खतरे से बचाने के लिए पुलिस तैनात है। पुलिस लोगों को कटान वाले हिस्से से दूर रख रही है, लेकिन गंगा की धार को रोकने के लिए तकनीकी बचाव कार्य का इंतजार है।
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ निरीक्षण से ऐतिहासिक स्थल नहीं बचेंगे। तत्काल पत्थरों की पिचिंग, जाल और अन्य तकनीकी उपायों से बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले समय में सिद्ध गंगा घाट का इतिहास केवल यादों में रह जाएगा।
