खुर्जा पॉटरी इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव: 3D प्रिंटिंग से मिनटों में तैयार हो रहे मनचाहे डिजाइन; पारंपरिक कला व तकनीक का मेल
खुर्जा के पाॅटरी उद्योग ने 3D प्रिंटिंग स्टूडियो स्थापित कर तकनीक के नए दौर में प्रवेश किया है। इससे उत्पादों ...और पढ़ें

खुर्जा के पॉटरी सेंटर एरिया में स्थित केपीएमए में लगी लैब में रखे थ्रीडी माॅडल। जागरण
HighLights
खुर्जा में 3D प्रिंटिंग स्टूडियो स्थापित किया गया।
नई तकनीक से मॉडल बनाना अब हुआ आसान।
उत्पादों की गुणवत्ता और फिनिशिंग में सुधार।
अनुज सोलंकी,खुर्जा (बुलंदशहर)। देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान और कलात्मक मिट्टी के बर्तनों के लिए प्रसिद्ध खुर्जा पाॅटरी उद्योग तकनीक के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। बाजार की मांग और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखते हुए यहां थ्री डी प्रिंटिंग स्टूडियो स्थापित किया गया है। इस तकनीक से माॅडल बनाना आसान हुआ है और उत्पादों की गुणवत्ता तथा फिनिशिंग में सुधार आया है।
खुर्जा क्षेत्र में करीब 400 छोटी-बड़ी पाटरी इकाइयां हैं। कारोबारी बदलती तकनीक को ध्यान में रखकर नए प्रयोग करते रहते हैं। इसी क्रम में खुर्जा पाटरी मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन (KPMA) परिसर में इंडिया एक्जिम बैंक के सहयोग से थ्री डी प्रिंटिंग स्टूडियो स्थापित किया गया है। उत्पादों की डिजाइनिंग और माडल तैयार करने के लिए चीन से अत्याधुनिक थ्री डी प्रिंटिंग मशीन मंगवाई गई।

खुर्जा के पाॅटरी सेंटर एरिया स्थित केपीएमए में लगी लैब में मशीन में बनते थ्रीडी माडल। जागरण
नई तकनीक से पाटरी के माडल तैयार करने की पुरानी और जटिल प्रक्रिया से काफी राहत मिली है। अब कारोबारी और कारीगर लैपटाॅप पर विभिन्न साफ्टवेयर की मदद से उत्पाद को मनचाहा आकार और डिजाइन दे सकते हैं। डिजिटल रूप से तैयार डिजाइन के आधार पर थ्री डी मशीन सटीक माॅडल तैयार करती है। इसके बाद मोल्ड बनाकर उत्पाद तैयार किया जाता है।
पहले उत्पाद का नमूना देखने के लिए कारीगर हस्तकला से माॅडल बनाते थे। इस प्रक्रिया में माडल की फिनिशिंग पूरी तरह नहीं हो पाती थी। एक अच्छा माडल तैयार करने में दो-तीन दिन लग जाते थे और उसके बाद मोल्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू होती थी। नई तकनीक से समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।
स्टूडियो संचालक मुकुल सक्सेना ने बताया कि आधुनिक तकनीक का लाभ खुर्जा के छोटे-बड़े कारोबारियों और कारीगरों तक पहुंचाने के लिए केपीएमए परिसर में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कारोबारियों की मांग पर माडल भी तैयार किए जा रहे हैं। अब तक करीब 80 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मांग के अनुसार माॅडल बनाने का काम भी जारी है।
इन्होंने कहा
थ्री डी तकनीक के जरिए माॅडल तैयार करना बेहद आसान हो गया है। साथ ही हस्तशिल्प कला में लगने वाले दो-तीन दिन के समय की भी बचत हुई है। लैपटाप पर डिजाइन तैयार करने के बाद महज छह से सात घंटे में माडल तैयार हो जाता है। यहां स्थापित स्टूडियो में कोई भी कारोबारी पहुंचकर प्रशिक्षण ले सकता है और माॅडल भी तैयार करा सकता है।
-दर्शन छतवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर, थ्री डी प्रिटिंग स्टूडियो एवं उपाध्यक्ष केपीएमए।
