जासं, बुलंदशहर : अक्सर छोटी-बड़ी वारदातों पर पुलिस सूझबूझ से काम लेती है, लेकिन ¨चगरावठी गांव में गोवंशों के अवशेष मिलने की घटना में पुलिस ने कुछ जल्दबाजी दिखा दी। अगर पुलिस वक्त और मौके की नजाकत को देखकर काम लेती तो आज न स्याना कोतवाल शहीद होते और न ही किसी के घर का चिराग बुझता।

पुलिस को करीब 11 बजे महाव गांव के गन्ने के खेत में गोवंशों के अवशेष मिलने की सूचना मिल गई थी। इसके बाद स्याना कोतवाल कुछ पुलिसकर्मियों को लेकर वहां पहुंच गए थे। इसी दौरान गोवंशों के अवशेष मिलने की जानकारी ¨चगरावठी व महाव गांव में आग की तरह फैल गई और वहां ¨हदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता जुट गए। उन्होंने पुलिस से आरोपितों पर कार्रवाई की मांग की। पुलिस के तल्ख तेवर देख कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और उन्होंने गोवंशों के अवशेषों को ट्रैक्टर-ट्राली में भर कर बुलंदशहर-स्याना हाईवे पर जाम लगा दिया। बस यहीं से खूनी बवाल की नींव रखी गई, जिसमें पुलिसकर्मियों की फटकार व लाठी चलाने की घटना ने टकराव का रूप ले लिया। इससे आक्रोशित ग्रामीणों व ¨हदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को घेरकर पथराव व लाठी-डंडों से हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से पुलिसकर्मियों के पैर उखड़ गए और उन्हें इधर-उधर भाग कर जान बचानी पड़ी, लेकिन तब तक भीड़ के घेरे में स्याना कोतवाल व तीन-चार पुलिसकर्मी फंस चुके थे।

हालात समझने में लगी देर

कम फोर्स और भीड़ के तेवर समझने में पुलिस की देरी ने बवाल करा दिया। अगर पर्याप्त मात्रा में पुलिस फोर्स होता तो पुलिस का एक्शन काम कर जाता।

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