गंगा के क्रोध की भेंट चढ़ा 300 बीघा जंगल व आठ हेक्टेयर का प्लांटेशन, 22 साल पहले भी दिखा था ऐसा ही रौद्र रूप
गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बुलंदशहर के अहार क्षेत्र में व्यापक कटान हुआ है। लगभग 300 बीघा वन क्षेत्र ...और पढ़ें

गंगा की धार में समाता वन क्षेत्र। जागरण
HighLights
गंगा के कटान से अहार क्षेत्र में व्यापक तबाही हुई हैस।
300 बीघा जंगल, 8 हेक्टेयर प्लांटेशन गंगा में समाया।
सिद्ध बाबा गंगा घाट कटान से बुरी तरह प्रभावित हुआ।
संवाद सूत्र, अहार (बुलंदशहर)। गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ अहार क्षेत्र में कटान ने व्यापक तबाही मचाई है। सिद्ध बाबा गंगा घाट से लेकर रिजर्व वन क्षेत्र मुबारिकपुर बागर तक गंगा की धार तेजी से जमीन को निगल रही है। अब तक लगभग 300 बीघा वन क्षेत्र और आठ हेक्टेयर में तैयार किया गया प्लांटेशन गंगा में समा चुका है।
कटान की चपेट में आए सैकड़ों पेड़ जड़ों समेत उखड़कर गंगा की धार में बह गए हैं। तेज बहाव के कारण जंगल की जमीन लगातार कट रही है। कहीं पेड़ गिर रहे हैं तो कहीं जमीन का बड़ा हिस्सा गंगा में समा रहा है। जिस वन क्षेत्र में कभी हरियाली थी, वहां अब गंगा की धारा अपना रास्ता बना चुकी है।
कटान का दायरा बढ़ने से रिजर्व वन क्षेत्र का शेष हिस्सा भी सुरक्षित नहीं रह गया है। सिद्ध बाबा गंगा घाट भी कटान से प्रभावित हुआ है। घाट का एक बड़ा हिस्सा गंगा में समा चुका है, जबकि करीब दस फीट आरसीसी सड़क भी कटकर गंगा में मिल गई है। लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने से बहाव और तेज हो गया है, जिससे कटान की रफ्तार भी बढ़ी है।
ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 22 वर्ष पहले भी क्षेत्र में गंगा का ऐसा ही रौद्र रूप देखने को मिला था। इस बार कटान का असर बड़े भूभाग पर दिखाई दे रहा है। वन विभाग के डिप्टी रेंजर रोहन चौधरी ने बताया कि 300 बीघा जंगल और आठ हेक्टेयर प्लांटेशन का गंगा में समाना केवल जमीन का नुकसान नहीं, बल्कि वर्षों में तैयार हुए वन क्षेत्र की बड़ी क्षति है।
मौसम में उतार-चढ़ाव बना
बुलंदशहर: मानूसन के कारण तेज बरसात की संभावना का असर शुक्रवार को स्पष्ट रूप से देखा गया। सुबह से आसमान में छाए बादल दोपहर बाद जमकर बरसे, जिससे मौसम सुहावना हो गया और गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने शनिवार को भी इसी तरह के मौसम की संभावना जताई है। मानूसन के प्रभाव से मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
गुरुवार को दिन की शुरुआत रिमझिम फुहारों के साथ हुई, जबकि शुक्रवार को तेज बरसात की संभावना जताई गई। दिन निकलते ही मानूसन के प्रभावी होने के संकेत मिलने लगे। बादलों ने डेरा डाल दिया और सूर्यदेव छिप गए, जिससे धूप नहीं निकल सकी। दोपहर बाद झमाझम बरसात शुरू हुई और शाम तक रुक-रुककर बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहा।
