जेएनएन, बुलंदशहर।

राज्य सरकार ने किसानों पर पराली जलाने के मुकदमे खत्म कर दिए हैं। इसके साथ ही कृषि विभाग की टीम को एक माह तक प्रोजेक्टर द्वारा फिल्म दिखाकर और गोष्ठी आयोजित कर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान की बाबत जागरूक करने के निर्देश दिए थे। इसी का नतीजा है कि पिछले एक माह में मात्र एक ही मामला पराली जलाने का सामने आया है। पराली जलाने की निगरानी सैटेलाइट से की जा रही है।

जिले में हजारों एकड़ धान की कटाई कंबाइन मशीनों से की जाती है। कंबाइन मशीनों की कटाई में ही खेतों में ज्यादा अवशेष रह जाते हैं। कटाई के बाद खेतों में खड़े रह जाने वाले धान ठूंठों से गेहूं की बोवाई में परेशानी आती है। कृषि विभाग ने डी-कंपोजर के लिए खेतों का सर्वे शुरू करा दिया है। आठ सितंबर से कृषि उपनिदेशक धनंजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी घनश्याम वर्मा आदि की टीम लगातार किसानों को पराली प्रबंधन की बाबत जागरुक कर रही है। गांवों में किसान सेवा रथ के जरिए प्रोजेक्टर लगाकर लघु फिल्म दिखाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और खेतों की उर्वरकता खत्म होने की बाबत लगातार जागरूक किया जा रहा है।

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635 किसानों ने गोआश्रय स्थलों के दी पराली

जागरुकता अभियान का असर जनपद के किसानों में दिखने लगा है। किसान पराली को गोआश्रय स्थलों में पहुंचा रहे हैं और वहां से खाद ट्रालियों में भरकर ला रहे हैं। सस्ते दामों की पराली के बदले खाद्य भारी मात्रा में दिया जा रहा है।

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इन्होंने कहा..

सैटेलाइट से पराली जलाने की निगरानी हो रही है, किसान रथ और गोष्ठियों से किसानों को लगातार जागरुक किया जा रहा है। किसान पराली के लिए सचेत हैं और एनजीटी के नियमों का पालन कर रहे हैं।

-धनंजय सिंह

उप कृषि निदेशक।

Edited By: Jagran