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बुलंदशहर में प्रदूषित पानी की निकासी न होने से उजड़ रहा बाग, सूख रहे फलदार पेड़; जिम्मेदार मौन

By Rakesh Gautam Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sat, 27 Jun 2026 07:38 PM (IST)

Bulandshahr News : बुलंदशहर के परतापुर गांव में प्रदूषित पानी की निकासी न होने से एक आम का बाग उजड़ ...और पढ़ें

नाले के गंदे व प्रदूषित पानी को बाग में जाने से रोकने के प्रयास को बांधी गई मेढ़। सौ जागरण

नाले के गंदे व प्रदूषित पानी को बाग में जाने से रोकने के प्रयास को बांधी गई मेढ़। सौ जागरण

HighLights

  1. चार वर्षों में दर्जनों फलदार आम के पेड़ सूखे।

  2. प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग।

संवाद सूत्र, बीबी नगर (बुलंदशहर)। गांव में प्रदूषित पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण गंदा पानी मेंढ़ तोड़कर आम के बाग में पहुंच रहा है, जिससे फलदार आम के पेड़ों के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। स्थिति यह है कि पिछले चार वर्षों में प्रदूषित पानी के लगातार संपर्क में आने से कई दर्जन हरे-भरे और फल देने वाले आम के पेड़ सूख चुके हैं।

क्षेत्र का गांव परतापुर में मुख्य मार्ग पर स्थित आम का बाग गांव के गंदे व प्रदूषित पानी की मार से दम तोड़ रहा है। बाग स्वामी विशेष सिरोही व जशेष सिरोही के अनुसार गांव का गंदा एवं प्रदूषित पानी निकासी मार्ग के अभाव में सीधे उनके आम के बाग में भर जाता है। इससे पेड़ों की जड़ें प्रभावित हो रही हैं और धीरे-धीरे पेड़ सूखते जा रहे हैं। इससे उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही आम उत्पादन में भी लगातार गिरावट आ रही है।

गत चार वर्षों में छह बीघा चौसा आम के करीब 40 पेड़ सूख चुके हैं। बाग स्वामी का कहना है कि इस गंभीर समस्या की शिकायत कई बार संबंधित विभागों और आला अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद प्रदूषित पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही है। फलदार और हरे-भरे पेड़ों का सूखना केवल एक किसान या बाग स्वामी का नुकसान नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। पेड़ों की संख्या घटने से क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द प्रदूषित पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था कराई जाए, ताकि आम के बाग को बचाया जा सके और भविष्य में पर्यावरण तथा किसानों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

शिकायतें बहुत, समाधान शून्य

आरोप है कि कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। गंदे व प्रदूषित पानी को खेत में जाने से रोकने के लिए कई बार ऊंची मेढ़ लगानी पड़ती है जो कुछ दिन में ही पानी के बहाव से टूट जाती है। अगर जल्द कोई स्थायी समाधान नही हुआ तो सम्पूर्ण बाग उजड़ जाएगा।

प्रशासक जहीर खान का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए 13 बीघा तालाब की सफाई कराई जा रही है। सफाई के उपरांत पानी की निकासी तालाब में कराई जाएगी।

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